बाजार नियामक SEBI ने ETF (Exchange Traded Fund) के नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को लागू करने की तारीख को आगे बढ़ा दिया है। अब यह बदलाव **1 सितंबर 2026** की जगह **7 सितंबर 2026** से प्रभावी होंगे, जिससे एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन को अपनी तकनीकी तैयारियों के लिए एक हफ्ते का अतिरिक्त समय मिल गया है।
तकनीकी तैयारी के लिए मिला समय
SEBI का यह कदम मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस, जैसे कि स्टॉक एक्सचेंजों की मांग के बाद उठाया गया है। ये संस्थाएं अपने बैकएंड सिस्टम को नए प्राइसिंग और ट्रेडिंग मैंडेट्स के साथ पूरी तरह से सिंक (sync) करना चाहती हैं, ताकि ट्रांजिशन के दौरान कोई ऑपरेशनल रिस्क न हो।
क्या बदलेगा नियमों में?
यह नया फ्रेमवर्क, जो 15 जून 2026 को जारी सर्कुलर का हिस्सा था, ETF ट्रेडिंग में पारदर्शिता लाने पर जोर देता है। इसमें प्रमुख बदलावों में शामिल हैं:
- बेस प्राइस कैलकुलेशन: अब पुराने T-2 नेट एसेट वैल्यू (NAV) के बजाय, पिछले ट्रेडिंग दिन के अंतिम 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) को आधार बनाया जाएगा।
- डायनामिक प्राइस बैंड्स: मार्केट की अस्थिरता को देखते हुए नए और सख्त प्राइस बैंड लागू किए जाएंगे।
- कमोडिटी ETF: इनके लिए प्री-ओपन कॉल ऑक्शन की प्रक्रियाओं को अपडेट किया गया है।
निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनके निवेश के मूल आधार में कोई बदलाव नहीं आया है। बाजार फिलहाल पुरानी व्यवस्था के तहत ही काम करता रहेगा। हालांकि, 7 सितंबर के बाद जब नए नियम लागू होंगे, तो ट्रेडिंग में और अधिक स्टेबिलिटी की उम्मीद है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने ब्रोकर या स्टॉक एक्सचेंज द्वारा जारी किए जाने वाले आधिकारिक अपडेट्स पर नजर रखें, ताकि स्विच-ओवर के दौरान किसी तरह की तकनीकी रुकावट का सामना न करना पड़े।
