SEBI का बड़ा कदम: AI साइबर हमलों से बचाने के लिए 'Cyber-Suraksha.ai' टास्क फोर्स का गठन

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AuthorMehul Desai|Published at:
SEBI का बड़ा कदम: AI साइबर हमलों से बचाने के लिए 'Cyber-Suraksha.ai' टास्क फोर्स का गठन
Overview

भारत के बाज़ार रेगुलेटर SEBI ने AI-संचालित साइबर खतरों से निपटने के लिए 'Cyber-Suraksha.ai' नाम की एक नई टास्क फोर्स का गठन किया है। यह वित्तीय संस्थानों को सख्त, निरंतर साइबर सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह देता है।

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SEBI ने भारतीय वित्तीय बाजारों के लिए अपनी साइबर सुरक्षा तैयारियों में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव की घोषणा की है। देश के वित्तीय बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते खतरों से निपटने के लिए रेगुलेटर ने 'Cyber-Suraksha.ai' नामक एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। इस टास्क फोर्स में मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशन्स (MIIs), रजिस्ट्रार और अन्य विनियमित संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह पहल पुराने साइबर सुरक्षा तरीकों से हटकर, AI के बढ़ते खतरों के खिलाफ लगातार, इंटेलिजेंस-आधारित रक्षा रणनीति पर जोर देती है, ताकि साइबर भरोसेमंदता में नेतृत्व स्थापित किया जा सके, न कि केवल नियामक अनुपालन तक सीमित रहा जाए।

AI से बढ़ते खतरे को समझना

AI-संचालित उपकरण सिस्टम की कमजोरियों का तेजी से पता लगा सकते हैं, लेकिन ये डेटा ब्रीच और एप्लिकेशन में सेंध लगने के जोखिम को भी काफी बढ़ा देते हैं। SEBI इस बात को समझता है कि भारत के आपस में जुड़े वित्तीय बाज़ार में एक जगह की कमजोरी पूरे सिस्टम में बड़ी समस्या पैदा कर सकती है। इस सलाह के तहत, ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लिकेशन को तुरंत पैच (Patch) करना होगा, साथ ही पारंपरिक और AI दोनों तरह के टूल्स का उपयोग करके नियमित रूप से भेद्यता मूल्यांकन (Vulnerability Assessment) करना होगा। इसमें संभावित हमले के बिंदुओं को कम करने के लिए मजबूत सुरक्षा सेटिंग्स, एक्सेस कंट्रोल और ज़ीरो ट्रस्ट नेटवर्क एक्सेस (ZTNA) पर जोर दिया गया है। KFin Technologies के चीफ इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर, श्रीनिवास यादव कर्री के अनुसार, AI से जुड़े सिस्टमिक जोखिम इंटरकनेक्टेड प्लेटफॉर्म, थर्ड-पार्टी वेंडर पर निर्भरता और AI-संचालित भेद्यता खोज की तीव्र गति से उत्पन्न होते हैं।

ग्लोबल पीयर्स का AI साइबर जोखिम पर फोकस

भारत का यह कदम एक ग्लोबल ट्रेंड के अनुरूप है, जहां वित्तीय रेगुलेटर AI गवर्नेंस और साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट जैसी संस्थाएं पब्लिक-प्राइवेट पहलों के माध्यम से AI जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाने के प्रयासों का नेतृत्व कर रही हैं। सिंगापुर में, मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर (MAS) निष्पक्षता, नैतिकता, जवाबदेही और पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित करते हुए AI जोखिम प्रबंधन दिशानिर्देशों पर सलाह-मशविरा कर रही है। यूरोपीय संघ का AI एक्ट जोखिम-आधारित दृष्टिकोण अपनाता है, जो उच्च-जोखिम वाले AI अनुप्रयोगों पर सख्त नियम लागू करता है। वहीं, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने चेतावनी दी है कि एडवांस्ड AI मॉडल कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए लगने वाले समय और लागत को काफी कम कर सकते हैं, जिससे सिस्टमिक वित्तीय स्थिरता को खतरा पैदा हो सकता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर ने भी चेतावनी दी है कि AI साइबर-जोखिम के परिदृश्य को मौलिक रूप से बदल सकता है।

चुनौतियां बनी हुई हैं: लेगेसी सिस्टम और थर्ड-पार्टी जोखिम

SEBI के निर्देशों के बावजूद, महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। खासकर भारतीय बैंकिंग क्षेत्र लेगेसी टेक्नोलॉजी, पुराने कोडिंग भाषाओं और खंडित सॉफ्टवेयर से जूझ रहा है, जो उन्हें एडवांस्ड AI खतरों के प्रति संवेदनशील बनाता है। बारक्लेज ग्लोबल सर्विस सेंटर इंडिया के एमडी और सीईओ, प्रवीण कुमार ने कहा कि पारंपरिक सुरक्षा उपाय AI खतरों के खिलाफ अपर्याप्त हैं, जिसके लिए AI-संचालित प्रतिवादों की आवश्यकता है। थर्ड-पार्टी वेंडरों पर निर्भरता जटिलता बढ़ाती है, क्योंकि सप्लाई चेन में एक भी सेंध लगने से व्यापक प्रभाव हो सकते हैं। रेगुलेटर खुद AI को अपनाने में वित्तीय क्षेत्र से पिछड़ सकते हैं, जो उभरते जोखिमों की निगरानी और उनसे लड़ने की उनकी क्षमता को बाधित कर सकता है। AI की दोहरी प्रकृति (आक्रामक और रक्षात्मक दोनों उपकरण के रूप में) और तेजी से नियम विकसित करने की कठिनाई, साइबर भरोसेमंदता के लिए एक निरंतर चुनौती पेश करती है।

भविष्य के निवेश और सहयोग

SEBI की सलाह से साइबर सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और समाधानों में महत्वपूर्ण निवेश की उम्मीद है, जिसका लाभ IT सर्विस प्रोवाइडर्स को होगा। KFin Technologies मल्टी-लेयर्ड डिफेन्स, एन्क्रिप्टेड APIs और अनुशासित पैच मैनेजमेंट को एकीकृत कर रहा है, साथ ही SBOM प्रैक्टिस के माध्यम से एडवांस्ड टेस्टिंग और सप्लाई चेन पारदर्शिता का मूल्यांकन भी कर रहा है। AI-सहायता प्राप्त डिफेन्स, निरंतर निगरानी और रेगुलेटर व बाजार सहभागियों के बीच बेहतर सहयोग को अपनाना भारत के वित्तीय बाजारों की अखंडता को बढ़ते खतरों से बचाने और सिस्टमिक लचीलापन बनाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.