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SEBI का बड़ा दांव: शेयर बायबैक की वापसी? टैक्स रिफॉर्म्स के बाद खुला नया रास्ता

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AuthorAditya Rao|Published at:
SEBI का बड़ा दांव: शेयर बायबैक की वापसी? टैक्स रिफॉर्म्स के बाद खुला नया रास्ता
Overview

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ओपन मार्केट शेयर बायबैक (Open Market Buybacks) को फिर से शुरू करने की संभावना तलाश रहा है। यह तरीका **1 अप्रैल, 2025** से रुका हुआ था। फाइनेंस एक्ट, **2026** के तहत किए गए टैक्स रिफॉर्म्स के बाद, बायबैक से मिलने वाली राशि को अब शेयरहोल्डर्स के लिए कैपिटल गेन्स (Capital Gains) के तौर पर ट्रीट किया जाएगा, जिससे पहले की टैक्स संबंधी चिंताओं को दूर किया जा सके।

SEBI की नई पहल: ओपन मार्केट बायबैक की वापसी?

मार्केट रेगुलेटर SEBI, लिस्टेड कंपनियों के लिए शेयर बायबैक का एक और तरीका फिर से लाने पर विचार कर रहा है। ओपन मार्केट बायबैक, जो 1 अप्रैल, 2025 से बंद थे, कंपनियों को शेयरधारकों को कैपिटल लौटाने का एक नया जरिया देते हैं। दुनिया भर में, इस तरीके को स्टॉक की सही कीमत (Price Discovery) पता लगाने, ट्रेडिंग एक्टिविटी बढ़ाने और कंपनियों के कैपिटल का बेहतर इस्तेमाल करने में मददगार माना जाता है। SEBI का यह प्रस्ताव वैश्विक मानकों के अनुरूप चलने और उन मुद्दों को ठीक करने की मंशा दिखाता है जिनके चलते इसे पहले रोका गया था।

टैक्स रिफॉर्म्स ने बदली राह

ओपन मार्केट बायबैक को वापस लाने के पीछे एक बड़ा कारण फाइनेंस एक्ट, 2026 में हुए टैक्स नियमों में बदलाव है। पहले, कंपनियों को बायबैक पर टैक्स देना पड़ता था, जिससे कंपनी को शेयर वापस बेचने वाले शेयरधारकों को फायदा होता था, जबकि अन्य शेयरधारक इससे वंचित रह जाते थे। नए टैक्स नियमों के तहत, 1 अप्रैल, 2026 से, बायबैक से मिली रकम को शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेन्स माना जाएगा। SEBI का मानना है कि इस बदलाव से ओपन मार्केट बायबैक और अन्य बायबैक प्रोग्राम टैक्स के नजरिए से एक जैसे हो जाएंगे। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी शेयरधारकों के साथ समान व्यवहार हो, चाहे वे किसी विशेष बायबैक ऑफर में भाग ले पाएं या न ले पाएं।

संभावित चिंताएं और अगला कदम

हालांकि, नए टैक्स स्ट्रक्चर के बावजूद कुछ चिंताएं बनी रह सकती हैं। ओपन मार्केट बायबैक की वापसी से मार्केट में हेरफेर (Market Manipulation) की संभावना बढ़ सकती है या कम अनुभवी निवेशकों के लिए अनपेक्षित समस्याएं पैदा हो सकती हैं। अतीत में, कुछ शेयरधारकों को अनुचित लाभ मिलने और दूसरों को बाहर रखे जाने की आलोचनाएं हुई थीं। SEBI का काम बाजार की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है, इसलिए सफल कार्यान्वयन के लिए कड़ी निगरानी की आवश्यकता होगी ताकि किसी भी तरह के पक्षपात या अनुचित सूचना लाभ को रोका जा सके।

उद्योग जगत का समर्थन और सार्वजनिक प्रतिक्रिया

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) और एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (AIBI) जैसे उद्योग समूहों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका मानना है कि बायबैक के इस तरीके को वापस लाने से कंपनियों को सेलिंग प्रेशर को मैनेज करने, पैनिक सेलिंग को कम करने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी। SEBI अब इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांग रहा है, जिसकी अंतिम तिथि अप्रैल 23 है।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.