SEBI का बड़ा कदम: 'Accredited Investor' नियमों में बदलाव की तैयारी, 4 लाख निवेशक होंगे पात्र?

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AuthorNeha Patil|Published at:
SEBI का बड़ा कदम: 'Accredited Investor' नियमों में बदलाव की तैयारी, 4 लाख निवेशक होंगे पात्र?

SEBI ने 'Accredited Investor' (AI) फ्रेमवर्क में बड़े बदलावों का प्रस्ताव दिया है। इसका मकसद योग्य निवेशकों की संख्या को करीब 1 लाख से बढ़ाकर 4 लाख तक ले जाना है। नए प्रस्तावों के तहत, फंड मैनेजर अपने क्लाइंट्स को खुद सर्टिफाई कर सकेंगे, लेकिन इस पर हितों के टकराव (conflict of interest) की चिंताएं भी जताई जा रही हैं।

'Accredited Investor' फ्रेमवर्क में बड़े बदलाव की ओर SEBI

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 'Accredited Investor' (AI) फ्रेमवर्क को बदलने के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य निवेशकों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना और पात्र निवेशकों की संख्या को बढ़ाना है। SEBI ने 13 अगस्त 2026 को यह प्रस्ताव पेश किया, जिसका लक्ष्य AI की संख्या को वर्तमान में करीब 1 लाख से बढ़ाकर 3.7 लाख से 4 लाख के बीच पहुंचाना है।

फंड मैनेजरों को मिलेगी सीधे सर्टिफाई करने की शक्ति?

प्रस्तावों में सबसे बड़ा बदलाव 'मैनेजर-लेड एक्रेडिटेशन' का है। इसके तहत, अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs), पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) और स्पेसिफाइड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) के मैनेजर अपने संभावित निवेशकों को सीधे प्रमाणित (certify) कर पाएंगे। SEBI का मानना है कि इससे स्वतंत्र एक्रेडिटेशन एजेंसियों पर निर्भरता कम होगी, जो प्रक्रिया में लागत और जटिलता जोड़ती हैं। इसके अलावा, SEBI ने सिक्योरिटीज मार्केट एसेट्स के आधार पर नई पात्रता मानदंड भी प्रस्तावित किए हैं, जिसमें व्यक्तियों के लिए ₹5 करोड़ और बॉडी कॉर्पोरेट्स के लिए ₹20 करोड़ की सीमा तय की गई है। इन नियमों के तहत, भारत के बाहर रहने वाले सभी व्यक्ति, जिनमें फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) भी शामिल हैं, उन्हें स्वतः ही एक्रेडिटेड निवेशक माना जाएगा।

हितों के टकराव की चिंताएं?

हालांकि इस कदम का मकसद 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ाना है, लेकिन बाजार के जानकारों ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है। मुख्य चिंता हितों के टकराव (conflict of interest) को लेकर है। आलोचकों का तर्क है कि जब निवेश प्रबंधक अपने ही क्लाइंट्स को प्रमाणित कर सकेंगे, तो यह उनके लिए क्लाइंट एक्विजिशन को कड़े ड्यू डिलिजेंस पर तरजीह देने का जरिया बन सकता है। यह डर भी है कि इससे निवेशकों की सुरक्षा के लिए बने सेफ्टी गार्ड कमजोर हो सकते हैं, खासकर जब वे जटिल या उच्च-जोखिम वाले वित्तीय उत्पादों में निवेश कर रहे हों।

जनता की राय का इंतजार

SEBI फिलहाल इन प्रस्तावों पर जनता से राय मांग रहा है, और यह कंसल्टेशन विंडो 3 सितंबर 2026 तक खुली रहेगी। अब यह देखना होगा कि SEBI अंतिम दिशानिर्देशों को हितों के टकराव की चिंताओं को दूर करने के लिए संशोधित करता है, या वर्तमान ड्राफ्ट के अनुसार ही मैनेजर-लेड एक्रेडिटेशन मॉडल को आगे बढ़ाता है। अंतिम निर्णय ही यह तय करेगा कि भविष्य में निवेशकों को उच्च-जोखिम वाले बाजार साधनों के लिए कैसे योग्य ठहराया जाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.