SEBI के नए क्लोजिंग ऑक्शन मैकेनिज्म ने ETF की कीमतों में विसंगति पैदा कर दी है। F&O वाले शेयरों के लिए **3:15 PM** पर ट्रेडिंग थमने और अन्य शेयरों के **3:30 PM** तक चालू रहने से iNAV कैलकुलेशन में गड़बड़ी हो रही है, जिसका खामियाजा निवेशकों को उठाना पड़ सकता है।
कीमतों में क्यों आ रही है गड़बड़ी?
3 अगस्त, 2026 को लागू हुए इस नए नियम के तहत, F&O सेगमेंट वाले शेयर 3:15 PM पर नॉर्मल ट्रेडिंग बंद करके ऑक्शन मोड में चले जाते हैं, जो 3:35 PM तक चलता है। वहीं, जो शेयर F&O में नहीं हैं, वे 3:30 PM तक सामान्य तरीके से ट्रेड करते हैं। जो ETF इन दोनों तरह के शेयरों का बास्केट रखते हैं, उनके लिए इस 15 मिनट की विंडो में 'इंडिकेटिव नेट एसेट वैल्यू' (iNAV) सटीक नहीं रह जाती। एक हिस्सा फिक्स हो जाता है, जबकि दूसरा हिस्सा फ्लक्चुएट होता रहता है, जिससे फेयर वैल्यू का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
लिक्विडिटी और ट्रेडर्स पर असर
यह तकनीकी गैप मार्केट मेकर्स के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। जब उन्हें ETF के सभी अंडरलाइंग एसेट्स की रियल-टाइम प्राइसिंग नहीं मिलती, तो वे सही 'बिड-आस्क स्प्रेड' कोट नहीं कर पाते। नतीजतन, रिटेल निवेशकों के लिए ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ जाती है। भारत का ETF इंडस्ट्री अब ₹11.71 लाख करोड़ का हो चुका है, इसलिए ऐसी छोटी तकनीकी खामियां भी बड़े वॉल्यूम को प्रभावित कर सकती हैं।
रेगुलेटरी सर्विलांस पर नजर
SEBI ने यह बदलाव पुराने 'वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस' के तरीकों में धांधली रोकने के लिए किया था। हालांकि, नया सिस्टम भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। अगस्त 2026 में ही रेगुलेटर ने ऑक्शन विंडो में हेरफेर करने वाली दो संस्थाओं पर पेनल्टी लगाई है। अब देखना यह है कि एक्सचेंज और एसेट मैनेजमेंट कंपनियां इस 15 मिनट की गैप को भरने के लिए क्या तकनीकी समाधान निकालती हैं। तब तक के लिए, बाजार के अंतिम मिनटों में ETF में बढ़ती वोलैटिलिटी (Volatility) से सावधान रहने की जरूरत है।
