SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कॉरपोरेट कल्चर में बड़े बदलाव की वकालत की है। उन्होंने फाउंडर्स से कहा कि वे पब्लिक मनी को पर्सनल कंट्रोल के बजाय एक जिम्मेदारी समझें। नियामक अब IPO के फंड इस्तेमाल और गवर्नेंस पर नियमों को सख्त करने की तैयारी कर रहा है।
शेयरधारकों के प्रति जवाबदेही
SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने साफ कर दिया है कि अब पब्लिक कंपनी को प्राइवेट फैमिली बिजनेस की तरह नहीं चलाया जा सकता। जब कोई कंपनी आम निवेशकों से पैसा जुटाती है, तो वह जनता की पूंजी संभाल रही होती है। फाउंडर्स को अब 'मालिक' के बजाय 'स्टूवर्ड' (संरक्षक) की भूमिका निभानी होगी। नियामक का मानना है कि बेहतर गवर्नेंस केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि कंपनी की लंबी अवधि की सफलता का सबसे बड़ा आधार है।
इसी को देखते हुए SEBI अब IPO से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल (utilization) और 'रिलेटेड-पार्टी ट्रांजेक्शन' को लेकर नियमों की समीक्षा कर रहा है, ताकि निवेशकों के हितों की रक्षा हो सके।
बोर्डरूम को मजबूत बनाने की तैयारी
अक्सर कंपनियों में 'सेरेमोनियल बोर्ड' देखने को मिलते हैं, जहां इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स सिर्फ नाम के लिए रखे जाते हैं। पांडे ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बोर्ड मेंबर्स को कठिन सवाल पूछने और फैसलों को चुनौती देने के लिए सशक्त होना चाहिए। इसके लिए SEBI, National Institute of Securities Markets (NISM) के साथ मिलकर बोर्ड के सदस्यों की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है।
टेक्नोलॉजी और डेटा पर नई नजर
आज के दौर में गवर्नेंस सिर्फ फाइनेंस तक सीमित नहीं है। SEBI चीफ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा निर्भरता को बड़ा ऑपरेशनल रिस्क माना है। उन्होंने युवा उद्यमियों को नसीहत दी कि वे केवल विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भर न रहें। भारत का R&D खर्च अभी GDP का महज 0.6% से 0.8% के आसपास है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है। भविष्य की कामयाबी अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) बनाने में है, न कि सिर्फ ऑपरेशंस को स्केल करने में।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को अब कंपनियों की सालाना रिपोर्ट और मैनेजमेंट की पारदर्शिता पर बारीक नजर रखनी चाहिए। जो कंपनियां बेहतर बोर्ड गवर्नेंस और कैपिटल के सही इस्तेमाल को प्राथमिकता दे रही हैं, वही भविष्य में सस्टेनेबल वैल्यू बना पाएंगी।
