SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने Calcutta Stock Exchange (CSE) के पुनरुद्धार पर संशय जताया है। साल **2013** से बंद पड़ा यह एक्सचेंज नेशनल प्लेटफॉर्म्स के सामने टिकने के लिए भारी निवेश और वॉल्यूम की कमी जैसी बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है।
क्या फिर खुलेगा CSE?
SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने उन चुनौतियों पर रोशनी डाली है जो Calcutta Stock Exchange (CSE) को फिर से शुरू करने में बाधा बन रही हैं। साल 2013 के अप्रैल से यह एक्सचेंज रेगुलेटरी नियमों के पालन न करने के कारण सस्पेंडेड है। हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार ने इसे फिर से खड़ा करने में दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन रेगुलेटर ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुपालन (compliance) के मामले में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
क्यों है वापसी मुश्किल?
बीते 20 सालों में भारतीय शेयर बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के आने से ट्रेडर्स अब ऐसी जगह प्राथमिकता देते हैं जहां स्पीड, कम लागत और हाई लिक्विडिटी हो। नेशनल इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सिस्टम ने रीजनल एक्सचेंजों के भौगोलिक लाभ को खत्म कर दिया है।
टेक्नोलॉजी और फंड्स की चुनौती
तुहिन कांत पांडे ने जोर देकर कहा कि आज के दौर में एक्सचेंज चलाने के लिए भारी कैपिटल खर्च की जरूरत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग जैसे आधुनिक सिस्टम्स को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती है। यदि एक्सचेंज के पास ऐसा कोई यूनिक बिजनेस मॉडल नहीं है जो पर्याप्त वॉल्यूम (trading volume) खींच सके, तो उसका टिकना बेहद मुश्किल होगा।
रेगुलेटरी रुख
SEBI का फोकस बाजार में पारदर्शिता और निवेशकों की सुरक्षा बनाए रखने पर है। एक्सचेंज को फिर से शुरू करने के लिए उसे सख्त गवर्नेंस फ्रेमवर्क और कैपिटल रिक्वायरमेंट्स को पूरा करना होगा। फिलहाल, निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि क्या CSE का मैनेजमेंट कोई क्रेडिबल प्लान पेश कर पाता है या नहीं।
