SEBI चेयरमैन की चेतावनी: भारतीय शेयर बाजार में तूफानी तेजी, पर 'ये' बड़ी चुनौती!

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AuthorNeha Patil|Published at:
SEBI चेयरमैन की चेतावनी: भारतीय शेयर बाजार में तूफानी तेजी, पर 'ये' बड़ी चुनौती!
Overview

SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने कहा है कि भारत के सिक्योरिटीज बाजार (securities markets) तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन हर किसी को इसमें शामिल करना (investor inclusion) एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि भले ही डिजिटल पहुंच बढ़ी है और निवेशकों की सुरक्षा के उपाय मजबूत हुए हैं, पर अभी भी देश के हर कोने और हर आय वर्ग के लोगों को बाजार से जोड़ना बाकी है।

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बाजार में जबरदस्त विस्तार

भारत का सिक्योरिटीज मार्केट (securities market) जबरदस्त ग्रोथ दिखा रहा है। इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) वित्त वर्ष 2016 में करीब ₹95 लाख करोड़ से बढ़कर अप्रैल 2026 तक लगभग ₹463 लाख करोड़ हो गया है। वहीं, रिटेल निवेशकों (retail investors) की संख्या 38 मिलियन से बढ़कर 145 मिलियन हो गई है, जो कि एक बड़ी उछाल है।

प्राइमरी मार्केट (primary market) में भी गतिविधियां तेज रही हैं। वित्त वर्ष 2026 में 366 IPOs आए, जिनसे करीब ₹1.9 लाख करोड़ जुटाए गए। इसी साल इक्विटी और डेट मार्केट ने कुल मिलाकर लगभग ₹13.6 ट्रिलियन जुटाने में मदद की।

Mutual Funds रिटेल निवेशकों के लिए निवेश का एक अहम जरिया बने हुए हैं। इनका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) वित्त वर्ष 2016 के ₹12 ट्रिलियन से बढ़कर अप्रैल 2026 तक लगभग ₹82 ट्रिलियन तक पहुंच गया है। मंथली Systematic Investment Plan (SIP) फ्लो भी पिछले एक दशक में करीब ₹3,000 करोड़ से बढ़कर ₹31,000 करोड़ से ज्यादा हो गया है। चेयरमैन पांडे ने जोर देकर कहा कि SIP के जरिए ₹250 जैसी छोटी रकम से भी निवेश की शुरुआत की जा सकती है।

समावेशन (Inclusion) की बड़ी खाई

बाजार के इस तेज विस्तार के बावजूद, जागरूकता और असल निवेश के बीच एक बड़ी खाई बनी हुई है। SEBI के इन्वेस्टर सर्वे 2025 के मुताबिक, 63% परिवार सिक्योरिटीज मार्केट प्रोडक्ट्स के बारे में जानते हैं, लेकिन केवल 9.5% ही सक्रिय रूप से निवेश करते हैं। भौगोलिक तौर पर भी यह अंतर साफ दिखता है - शहरी इलाकों में जहां निवेश दर करीब 15% है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह सिर्फ 6% है। पांडे ने इसी असमानता को अगला बड़ा चैलेंज बताया है और 'समावेशी विकास' (inclusive growth) पर जोर दिया है, ताकि हर वर्ग और हर इलाके के लोग बाजार से जुड़ सकें।

नए फाइनेंसिंग रास्ते

पांडे ने पारंपरिक इक्विटी और डेट के अलावा नए फाइनेंसिंग इंस्ट्रूमेंट्स (financing instruments) के बढ़ते महत्व पर भी प्रकाश डाला। Real Estate Investment Trusts (REITs), Infrastructure Investment Trusts (InvITs), और म्युनिसिपल बॉन्ड (municipal bonds) जैसे प्रोडक्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास के लिए अहम साबित हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2026 तक, 22 शहरी स्थानीय निकायों ने 31 म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करके ₹4,500 करोड़ से ज्यादा जुटाए हैं, जो शहरी विकास परियोजनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण टूल के रूप में उभर रहे हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.