बाजार नियामक SEBI ने Axis Capital को एक सख्त चेतावनी दी है। कंपनी पर आरोप है कि उसने मर्चेंट बैंकर के दायरे से बाहर जाकर डिबेंचर डील्स में 'क्रेडिट गारंटी' दी, जिसके चलते Sojo Infotel मामले में उसे **₹166.84 करोड़** का भुगतान करना पड़ा।
सेबी (SEBI) ने साफ कर दिया है कि मर्चेंट बैंकर्स को अपने निर्धारित दायरे में ही काम करना होगा। जांच में सामने आया कि Axis Capital ने नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स (NCD) में निवेशकों को क्रेडिट गारंटी दी थी, जो मर्चेंट बैंकिंग के नियमों के खिलाफ है। इस तरह के कदम ने कंपनी को एक 'लेंडर' (ऋणदाता) की भूमिका में खड़ा कर दिया, जबकि उसे सिर्फ एक सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर काम करना था।
Sojo Infotel का विवादित मामला
पूरा विवाद Sojo Infotel Pvt Ltd के साथ हुई एक डील से शुरू हुआ। सेबी ने पाया कि Axis Capital ने इस डील को ऐसे स्ट्रक्चर किया था कि अगर जारीकर्ता (Issuer) पैसा नहीं चुका पाता, तो कंपनी को भुगतान करना पड़ता। जब जारीकर्ता डिफॉल्ट कर गया, तो Axis Capital ने ₹166.84 करोड़ का भुगतान करके अपनी साख बचाने की कोशिश की, जो सीधे तौर पर क्रेडिट जोखिम लेने के बराबर है।
कमाई का जरिया और नियामक रुख
रेगुलेटर ने डेटा खंगाला तो पता चला कि इस तरह के स्ट्रक्चर्ड डील्स से कंपनी ने लगभग ₹299 करोड़ की कमाई की थी। हालांकि कंपनी का तर्क था कि इसके पीछे एसेट हाइपोथिकेशन का सपोर्ट था, लेकिन सेबी का मानना है कि इससे क्रेडिट रिस्क गलत तरीके से मर्चेंट बैंकर पर शिफ्ट हुआ। हालांकि, कंपनी ने अप्रैल 2023 में ऐसी प्रथाओं को बंद कर दिया है, लेकिन यह मामला मार्केट इंटरमीडियरीज के लिए एक कड़ा सबक है कि वे अपने तय नियमों से खिलवाड़ न करें।
