SEBI की जांच में सामने आया है कि Setco Automotive और उसके प्रमोटर्स ने कई गंभीर वित्तीय अनियमितताएं की हैं। रेगुलेटर ने पाया कि ₹124.45 करोड़ की बड़ी रकम को मार्केटिंग/लाइसेंसिंग सर्विस कमीशन के नाम पर एक प्रमोटर एंटिटी (SEPL) में डायवर्ट किया गया। इतना ही नहीं, कंपनी और उसकी सब्सिडियरी Setco Auto Systems Pvt. Ltd. (SASPL) पर ₹19.05 करोड़ का गबन करने का भी आरोप है, जिसे SEPL और TTPL में निवेश के नाम पर इस्तेमाल किया गया। यह भी आरोप है कि India Resurgence Fund (IRF) से जुटाई गई रकम कंपनी के बजाय प्रमोटर्स की देनदारियों को चुकाने में इस्तेमाल हुई।
SEBI ने इस मामले में शेयरधारकों को पर्याप्त जानकारी न देने और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने को धोखाधड़ी माना है। प्रमोटर्स ने कंपनी के पैसों का इस्तेमाल अपनी गिरवी रखी संपत्तियों को छुड़ाने और SEPL के कर्जों को चुकाने के लिए किया, जिसकी पूरी जानकारी शेयरधारकों को नहीं दी गई।
इन गंभीर उल्लंघनों के चलते, SEBI ने श्री हरीश शेठ, श्री उदित हरीश शेठ, सुश्री ऊर्जा हर्षल शाह और श्री जतिंदर वीर सिंह गुजराल पर एक से दो साल तक के लिए बाजार पहुंच पर प्रतिबंध (Market Access Ban) लगा दिया है। इसके अलावा, श्री हरीश शेठ और श्री उदित हरीश शेठ को संयुक्त रूप से ₹19.05 करोड़ की राशि 23% वार्षिक ब्याज के साथ SAL/SASPL को तुरंत वापस करने का आदेश दिया गया है। इन व्यक्तियों पर SEBI एक्ट के तहत अलग से मौद्रिक दंड भी लगाया गया है।
यह भी सामने आया है कि Setco Automotive और उसकी सब्सिडियरी SASPL लगातार फाइनेंशियल डिस्ट्रेस से गुजर रही हैं, और हाल ही में SASPL की क्रेडिट रेटिंग को ICRA द्वारा 'D' (डिफ़ॉल्ट) तक घटा दिया गया था। हालांकि, कंपनियों पर सीधे तौर पर कोई वित्तीय जुर्माना नहीं लगाया गया है, लेकिन SEBI ने उन्हें अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कार्य से बचने और भविष्य में सही और पर्याप्त खुलासे सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कुछ स्वतंत्र निदेशकों और पूर्व CFO को कुछ आरोपों से बरी कर दिया गया है, लेकिन भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की चेतावनी दी गई है।