SEBI ने EKI Energy Services और उसके टॉप मैनेजमेंट पर बड़ी कार्रवाई की है। कंपनी पर **₹197 करोड़** की फर्जी रेवेन्यू दिखाने और **₹26 करोड़** के फंड को गलत तरीके से डायवर्ट करने का आरोप है, जिसके बाद कंपनी को **2 महीने** और MD को **12 महीने** के लिए मार्केट से बैन कर दिया गया है।
वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने EKI Energy Services Limited के खिलाफ एक विस्तृत जांच के बाद कड़ा रुख अपनाया है। जांच में सामने आया कि कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2023 के पहले 3 क्वार्टर्स के दौरान लगभग ₹197.04 करोड़ का रेवेन्यू समय से पहले ही दिखा दिया था, जिससे निवेशकों को कंपनी की परफॉरमेंस के बारे में गलत संकेत मिले।
इतना ही नहीं, कंपनी ने ₹26.34 करोड़ के फर्जी खर्चे दिखाए। इन खर्चों को उन सेवाओं के लिए बुक किया गया जो कभी ली ही नहीं गई थीं, ताकि कंपनी के फंड को इधर-उधर किया जा सके।
कौन-कौन निशाने पर?
- Manish Kumar Dabkara (Managing Director): इन्हें 12 महीने के लिए मार्केट से बैन किया गया है और ₹28 लाख का जुर्माना लगाया गया है।
- EKI Energy Services: कंपनी को 2 महीने तक मार्केट गतिविधियों से दूर रहने का आदेश दिया गया है और ₹12 लाख का जुर्माना लगाया गया है।
- इसके अलावा, पूर्व CFO और अन्य डायरेक्टर्स पर भी 1 से 8 महीने तक का बैन लगाया गया है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
SEBI ने साफ कर दिया है कि कंपनी के MD को डायवर्ट किए गए फंड को वापस वसूलने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे। यह पूरा मामला कंपनी के इंटरनल कंट्रोल और कॉरपोरेट गवर्नेंस पर बड़े सवाल खड़े करता है। निवेशकों के लिए अब यह देखना बेहद जरूरी होगा कि कंपनी इन गवर्नेंस फेलियर को कैसे ठीक करती है और भविष्य में अपनी साख कैसे बहाल करती है।
