SEBI ने Real Estate Investment Trusts (REITs) और Infrastructure Investment Trusts (InvITs) को विदेशी निवेशकों के लिए डिपॉजिटरी रसीदें (Depository Receipts) जारी करने की मंजूरी दे दी है। इस कदम का मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के लिए विदेशी पूंजी के द्वार खोलना है। हालांकि, रेगुलेटर ने भारतीय निवासियों और NRI को इन इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।
विदेशी पूंजी तक आसान पहुंच
सेबी (SEBI) के इस नए फ्रेमवर्क के जरिए अब REITs और InvITs अंतरराष्ट्रीय बाजारों से पूंजी जुटा सकेंगे। यह बदलाव इन ट्रस्टों को घरेलू निवेशकों पर निर्भरता कम करने और ग्लोबल स्तर पर मौजूद बड़े फंड्स—खासकर पेंशन फंड्स—तक पहुंच बनाने में मदद करेगा। डिपॉजिटरी रसीदें एक ऐसा जरिया है जिससे विदेशी निवेशक भारतीय स्टॉक एक्सचेंज पर सीधे यूनिट्स खरीदे बिना इनमें निवेश कर पाएंगे।
सुरक्षा के कड़े नियम
किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए SEBI ने कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। भारतीय निवासियों और NRI का इन रसीदों को रखना मना है। यह कदम मुख्य रूप से 'राउंड-ट्रिपिंग' या 'सर्कुलर ट्रेडिंग' जैसे जोखिमों से बचने के लिए उठाया गया है ताकि सिस्टम में केवल असली विदेशी पूंजी ही आए।
ऑपरेशनल बदलाव और लचीलापन
फंड जुटाने के अलावा, सेबी ने ट्रस्टों को अधिक फ्लेक्सिबिलिटी भी दी है:
- ट्रस्ट अब अंडर-कंस्ट्रक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर या रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में माइनॉरिटी स्टेक ले सकते हैं।
- 'रिमोट कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर' की परिभाषा का विस्तार किया गया है।
- 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के लिए कूलिंग-ऑफ पीरियड में बदलाव किए गए हैं, जिससे मार्केट से फंड जुटाने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
निवेशकों के नजरिए से, यह कदम REITs और InvITs के ग्लोबल होने की शुरुआत है। इससे भविष्य में प्रोजेक्ट्स के लिए कर्ज की लागत (Borrowing Cost) कम हो सकती है। हालांकि, ग्लोबल फंडिंग बढ़ने के साथ ही 'फॉरेन एक्सचेंज रिस्क' और दुनिया भर की ब्याज दरों में होने वाले बदलावों का असर भी इन पर पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि ट्रस्ट अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी में इस सुविधा को कैसे इंटीग्रेट करते हैं और क्या इससे वाकई में प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ती है।
