SEBI ने एक नया फ्रेमवर्क जारी किया है, जिसके तहत अब REITs और InvITs को GIFT City के इंटरनेशनल एक्सचेंज पर विदेशी मुद्रा में डिपॉजिटरी रसीदें जारी करने की अनुमति मिल गई है। साथ ही, प्राइवेट InvITs के लिए कूलिंग-ऑफ पीरियड को घटाकर **8 हफ्ते** कर दिया गया है।
ग्लोबल कैपिटल के लिए खुला नया रास्ता
SEBI ने अपनी हालिया घोषणा में REITs और InvITs को विदेशी मुद्रा में डिपॉजिटरी रसीदें (Depository Receipts) जारी करने की अनुमति दी है। ये रसीदें गिफ्ट सिटी (GIFT City) स्थित इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज और NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज पर लिस्ट की जाएंगी। इस पहल का मुख्य मकसद भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट संपत्तियों के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स तक पहुंच आसान बनाना है।
सख्त नियम और अनुपालन
मौजूदा यूनिटधारकों के हितों की रक्षा के लिए रेगुलेटर ने कड़े नियम तय किए हैं। डिपॉजिटरी रसीदें जारी करने के लिए कम से कम 75% यूनिटधारकों की मंजूरी अनिवार्य होगी। इसके अलावा, भारत में रहने वाले निवासी इन रसीदों को नहीं खरीद पाएंगे, जिससे यह चैनल पूरी तरह से क्रॉस-बॉर्डर इन्वेस्टमेंट के लिए सुरक्षित रहे। साथ ही, आर्थिक भगोड़ों या विलफुल डिफॉल्टर्स को इनमें निवेश करने से पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।
लिक्विडिटी सुधारने पर जोर
घरेलू बाजार में लिक्विडिटी की समस्या को देखते हुए, SEBI ने प्राइवेटली लिस्टेड InvITs के नियमों में ढील दी है। ऑफर-फॉर-सेल (OFS) ट्रांजेक्शन के लिए कूलिंग-ऑफ पीरियड को 12 हफ्ते से घटाकर 8 हफ्ते कर दिया गया है। इससे निवेशकों के लिए एग्जिट का रास्ता आसान होगा और सेकेंडरी मार्केट में कामकाज तेज होगा।
हालांकि, इन्वेस्टर्स को यह ध्यान रखना होगा कि गिफ्ट सिटी का इकोसिस्टम अभी शुरुआती दौर में है और टैक्स से जुड़े नियम इन्वेस्टर की टैक्स रेजिडेंसी के आधार पर अलग हो सकते हैं। इसके अलावा, रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में ब्याज दरों और प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने जैसे रिस्क हमेशा बने रहते हैं, जिसका असर इन ट्रस्टों के प्रदर्शन पर दिख सकता है।
