SEBI ने पोर्टफोलियो मैनेजर्स (PMS) को क्लाइंट्स का पैसा विदेशी स्टॉक और REITs जैसे ग्लोबल एसेट्स में निवेश करने की हरी झंडी दे दी है। हालांकि, निवेश की सीमा (Investment Limits) तय करने का अधिकार अब भी Reserve Bank of India (RBI) के पास ही होगा।
निवेश का नया दायरा
भारतीय शेयर बाजार के रेगुलेटर SEBI ने घरेलू पोर्टफोलियो मैनेजर्स के लिए ग्लोबल मार्केट के दरवाजे खोल दिए हैं। 24 सितंबर, 2026 को जारी नए नियमों के तहत, अब PMS कंपनियां अपने क्लाइंट्स का पैसा विदेशी लिस्टेड शेयरों, डेट सिक्योरिटीज, सरकारी बॉन्ड्स और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) में निवेश कर सकेंगी। यह उन निवेशकों के लिए एक बड़ा मौका है जो अपनी पोर्टफोलियो को ग्लोबल स्तर पर डायवर्सिफाई करना चाहते हैं।
SEBI और RBI का तालमेल
इस नियम के साथ ही स्पष्ट कर दिया गया है कि 'कौन से एसेट्स में पैसा लगाना है' यह तो SEBI तय करेगा, लेकिन 'कितना पैसा देश के बाहर जाएगा' (Outflow), इसका फैसला RBI ही लेगा। यह पूरा निवेश Foreign Exchange Management Act (FEMA) और Liberalised Remittance Scheme (LRS) के दायरे में होगा। निवेशकों को अब SEBI के मार्केट नियमों के साथ-साथ RBI के फॉरेक्स नियमों का भी कड़ाई से पालन करना होगा।
विदेशी निवेशकों के लिए आसान राह
सिर्फ घरेलू निवेश ही नहीं, बल्कि विदेशी निवेशकों (FIIs) के लिए भी प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। अब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और पेपरवर्क कम करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि SWIFT और इंडिया मार्केट एक्सेस पोर्टल के जरिए ग्लोबल मनी का आना आसान हो सके।
निष्क्रिय कंपनियों पर सख्ती
रेगुलेटर ने उन कंपनियों पर भी लगाम कसने की बात कही है जो केवल कागजों पर चल रही हैं और बिजनेस में निष्क्रिय हैं। शेयर बाजारों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसी कंपनियों की पहचान करें और जरूरत पड़ने पर उन्हें डीलिस्ट (Delist) करें, ताकि रिटेल निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहे।
निवेशकों के लिए चेतावनी
जो निवेशक अब ग्लोबल पोर्टफोलियो बनाने की सोच रहे हैं, उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि विदेशी निवेश में 'करेंसी रिस्क' (Currency Risk) सबसे बड़ा फैक्टर है। रुपया और विदेशी करेंसी के बीच का उतार-चढ़ाव सीधे आपके मुनाफे पर असर डाल सकता है।
