SEBI ने एक बड़ा बदलाव करते हुए Mutual Funds को कैश मार्केट ऑब्लिगेशन में 'नेट सेटलमेंट' की सुविधा देने का ऐलान किया है। 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले इस नए नियम से फंड्स की लिक्विडिटी बेहतर होगी और सेटलमेंट की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
क्या है नया बदलाव?
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने Mutual Funds के लिए सेटलमेंट के नियमों को आसान बनाने का फैसला लिया है। अभी तक फंड हाउस को अपने स्टॉक मार्केट ट्रेड के लिए 'ग्रॉस बेसिस' पर सेटलमेंट करना पड़ता है। यानी, अगर किसी फंड ने ₹100 करोड़ के शेयर खरीदे और ₹80 करोड़ के बेचे, तो उसे पूरा ₹100 करोड़ का भुगतान पहले करना पड़ता है और फिर ₹80 करोड़ की रिकवरी का इंतजार करना होता है।
नए नियम के तहत, फंड्स अब इन ऑब्लिगेशन्स को आपस में एडजस्ट कर सकेंगे। ऊपर दिए गए उदाहरण में, फंड को सिर्फ नेट अमाउंट यानी ₹20 करोड़ का भुगतान करना होगा। इससे मार्केट में फंड्स की लिक्विडिटी पर दबाव कम होगा।
सुरक्षा और नियम (Strict Parameters)
SEBI ने इसे लेकर सख्त नियम भी बनाए हैं ताकि निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहे:
- स्कीम लेवल पर छूट: यह सुविधा केवल एक ही स्कीम के भीतर उपलब्ध होगी। एक Asset Management Company (AMC) अपनी दो अलग-अलग स्कीमों (जैसे Large-cap और Mid-cap) के बीच ऑब्लिगेशन को नेट नहीं कर पाएगी।
- अपवाद: अगर कोई फंड एक ही सेटलमेंट साइकिल में एक ही सिक्योरिटी को खरीदता और बेचता है, तो वहां 'ग्रॉस सेटलमेंट' ही होगा।
- क्या दायरे से बाहर है? डेरिवेटिव्स, सिक्योरिटीज लेंडिंग और शॉर्ट-सेलिंग इस नए नेटिंग फ्रेमवर्क का हिस्सा नहीं होंगे।
इंडस्ट्री पर असर
इस बदलाव के लिए AMCs को अपने अकाउंटिंग सिस्टम को अपग्रेड करना होगा। Association of Mutual Funds in India (AMFI) को स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन्स के साथ मिलकर अप्रैल 2027 की डेडलाइन से पहले इसके लिए ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स तैयार करने को कहा गया है।
