सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर के एक पूर्व कर्मचारी और उसके चचेरे भाई के खिलाफ SEBI के इनसाइडर ट्रेडिंग के फैसले को बरकरार रखा है। रेगुलेटर ने पाया कि कंपनी के मार्च 2023 के नतीजों से पहले गैर-सार्वजनिक मुनाफा (non-public profit) की जानकारी साझा करने से अवैध कमाई हुई। ट्रिब्यूनल ने उल्लंघन की पुष्टि की, लेकिन पूर्व कर्मचारी के लिए ₹15 लाख का जुर्माना घटाकर ₹10 लाख कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर से जुड़े एक इनसाइडर ट्रेडिंग मामले में अपना फैसला सुना दिया है। यह मामला कंपनी के 31 मार्च, 2023 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के नतीजों की घोषणा से पहले की गतिविधियों पर केंद्रित था। SEBI ने पहले ही इस मामले की जांच की थी और पाया था कि कंपनी के अपेक्षित प्रदर्शन (expected performance) से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक होने से पहले ही लीक हुई थी।
पूर्व कर्मचारी के खिलाफ फैसला?
SAT ने इस बात की पुष्टि की कि कंपनी के पूर्व कर्मचारी, नितिन कुमार गर्ग ने अपने चचेरे भाई, अनुपम गुप्ता के साथ गैर-सार्वजनिक जानकारी साझा की थी। इस जानकारी में कंपनी के मजबूत वित्तीय नतीजों की उम्मीदें शामिल थीं। ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि ऑफिस के अंदर मुनाफे की घोषणा (profit announcements) और वार्षिक रखरखाव शुल्क (annual maintenance charges) में बदलावों पर हुई चर्चा को 'अप्रकाशन योग्य मूल्य-संवेदनशील जानकारी' (unpublished price-sensitive information - UPSI) माना जाएगा। बाजार नियमों के तहत, ऐसी जानकारी को सार्वजनिक होने तक ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
ट्रेडिंग से मुनाफा और एक्शन
जांच में पता चला कि अनुपम गुप्ता ने 13 अप्रैल से 25 मई, 2023 के बीच न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर के 3,020 शेयर औसतन ₹629.73 प्रति शेयर के भाव पर खरीदे थे। कंपनी के नतीजे आने के बाद, जिनमें मुनाफे में बड़ी बढ़ोतरी दिखाई गई थी, इन शेयरों को बेच दिया गया। इस ट्रेडिंग से लगभग ₹8.98 लाख का मुनाफा हुआ। ट्रिब्यूनल के सामने पेश किए गए सबूतों में बैंक रिकॉर्ड, ट्रेडिंग लॉग और संचार शामिल थे, जिनसे आंतरिक जानकारी और किए गए ट्रेडों के बीच संबंध स्थापित हुआ।
स्वीकारोक्ति और जुर्माने का फैसला
मामले से जुड़े लोगों ने जांच के दौरान अपनी स्वीकारोक्ति (admissions) दी थी। नितिन कुमार गर्ग ने माना कि उन्होंने अपने चचेरे भाई के खाते का इस्तेमाल ट्रेडिंग के लिए जानबूझकर किया क्योंकि उन्हें डर था कि उनके अपने लेनदेन पर नजर रखी जाएगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने खुद इन ट्रेडों के लिए पैसा लगाया था। अपने अंतिम आदेश में, ट्रिब्यूनल ने अनुपम गुप्ता के लिए ₹10 लाख के जुर्माने की पुष्टि की। वहीं, नितिन कुमार गर्ग के मामले में, ट्रिब्यूनल ने यह ध्यान में रखा कि उन्हें पहले ही नौकरी से निकाला जा चुका है और उनके खिलाफ सिक्योरिटीज कानूनों के उल्लंघन का कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं था। नतीजतन, SEBI द्वारा मूल रूप से लगाए गए ₹15 लाख के जुर्माने को घटाकर उनके लिए ₹10 लाख कर दिया गया।
यह मामला निवेशकों के लिए कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) और आंतरिक नियंत्रण (internal controls) के महत्व को दर्शाता है। यह इस बात की याद दिलाता है कि सूचीबद्ध कंपनियों के कर्मचारियों के लिए आंतरिक जानकारी को संभालना कितना महत्वपूर्ण है।
