Securities Appellate Tribunal (SAT) ने Ventura Securities पर लगाई गई ₹1.49 करोड़ की पेनल्टी को खारिज कर दिया है। प्रक्रियात्मक गलतियों के चलते एक्सचेंज को अब ब्रोकरेज को टैक्स और कानूनी खर्च सहित कुल **₹1.76 करोड़** वापस करने होंगे।
पेनल्टी रद्द होने की वजह
ट्रिब्यूनल की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जिस पेनल्टी नोटिस पर कार्रवाई की गई थी, उस पर एक ऐसे बाहरी एक्सपर्ट के हस्ताक्षर थे, जिनका कार्यकाल सितंबर से कई महीने पहले मार्च में ही समाप्त हो चुका था। SAT ने साफ कहा कि कानूनी रूप से वही आदेश मान्य है जिस पर हस्ताक्षर करने वाला अधिकारी उस समय पद पर हो। इस प्रशासनिक चूक के कारण एक्सचेंज की पूरी कार्रवाई को अवैध करार दिया गया।
ब्रोकरेज को मिलेगा भारी रिफंड
SAT ने एक्सचेंज को आदेश दिया है कि वे Ventura Securities को ₹1.76 करोड़ की राशि वापस करें। इस रकम में मूल पेनल्टी, उस पर लगा GST और कानूनी लड़ाई का ₹1 लाख का खर्च शामिल है। एक्सचेंज ने मामले पर दोबारा विचार करने की अपील की थी, जिसे ट्रिब्यूनल ने सिरे से खारिज कर दिया।
विवाद की जड़ क्या थी?
यह पूरा मामला नेचुरल गैस ऑप्शंस में क्लाइंट-लेवल पोजीशन लिमिट के कथित उल्लंघन से जुड़ा था। ब्रोकरेज का तर्क था कि एक्सचेंज ने अपनी पॉलिसी के मुताबिक अनिवार्य अलर्ट नहीं भेजे थे। साथ ही, ब्रोकरेज ने यह भी मुद्दा उठाया था कि पेनल्टी की राशि ₹2 लाख की रेगुलेटरी लिमिट से कहीं अधिक थी। ट्रिब्यूनल ने माना कि एक्सचेंज ने इन अहम दलीलों पर गौर नहीं किया, जिससे उनकी कार्यवाही का आधार ही कमजोर हो गया। यह फैसला इस बात का कड़ा संदेश है कि फर्स्ट-लाइन रेगुलेटर के रूप में एक्सचेंजों को अपनी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता और सटीकता बरतनी होगी।
