SEBI और विदेशी निवेशकों के बीच विवाद खत्म, फाइल नोटिंग्स शेयर करने पर बनी सहमति

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AuthorNeha Patil|Published at:
SEBI और विदेशी निवेशकों के बीच विवाद खत्म, फाइल नोटिंग्स शेयर करने पर बनी सहमति

Securities Appellate Tribunal (SAT) ने 5 विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की अपील को बंद कर दिया है। SEBI ने इन निवेशकों को अपनी इंटरनल फाइल नोटिंग्स देने पर सहमति जता दी है, जो लंबे समय से विवाद का विषय बनी हुई थीं।

विवाद का समाधान और फाइल नोटिंग्स

Securities Appellate Tribunal (SAT) ने सोमवार को SEBI और 5 विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के बीच चल रहे कानूनी विवाद को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया है। मामला तब सुलझा जब बाजार नियामक ने अपने एडजुकेटिंग ऑफिसर द्वारा दर्ज की गई फाइल नोटिंग्स की प्रतियां साझा करने पर सहमति व्यक्त की। यह फाइल नोटिंग्स 1995 के SEBI (Procedure for Holding Inquiry and Imposing Penalties) नियमों के नियम 4(3) के तहत तैयार की गई थीं, जिन्हें लेकर पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ था।

कौन से निवेशक थे शामिल?

इस कानूनी लड़ाई में Albula Investment Fund, Asia Investment Corporation (Mauritius), LTS Investment Fund, Cresta Fund और APMS Investment Fund शामिल थे। इन फंड्स का तर्क था कि जांच शुरू करने से पहले उन्हें रेगुलेटर की पूरी इंटरनल ओपिनियन जानने का अधिकार है। पहले SEBI इन नोटिंग्स के केवल कुछ हिस्से ही साझा कर रहा था, जिसे निवेशक चुनौती दे रहे थे।

जांच का भविष्य और बाजार का नज़रिया

हालांकि यह प्रक्रियात्मक बाधा (Procedural Hurdle) अब दूर हो गई है, लेकिन यह निवेशकों के लिए क्लीन चिट नहीं है। इन फंड्स की भूमिका Hindenburg Research की रिपोर्ट के बाद Adani Group कंपनियों में निवेश को लेकर चर्चा में आई थी। SAT ने स्पष्ट किया है कि उसका फैसला केवल डॉक्यूमेंट्स साझा करने तक सीमित था, न कि मामले की मेरिट पर।

अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इन डॉक्यूमेंट्स के मिलने के बाद जांच की अगली प्रक्रिया क्या होगी। यह स्पष्ट है कि रेगुलेटरी जांच अभी पूरी तरह से सक्रिय है और आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.