F&O Trading: रिटेल ट्रेडर्स को भारी झटका, एक साल में डूबे **₹91,685 करोड़**

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AuthorAditya Rao|Published at:
F&O Trading: रिटेल ट्रेडर्स को भारी झटका, एक साल में डूबे **₹91,685 करोड़**

भारतीय डेरिवेटिव मार्केट में रिटेल ट्रेडर्स के लिए समय काफी मुश्किल रहा है। वित्त वर्ष 2026 में करीब **88%** व्यक्तिगत ट्रेडर्स को नुकसान उठाना पड़ा है, जिसका कुल आंकड़ा **₹91,685 करोड़** तक पहुंच गया है।

मुनाफे की तलाश में कैसे हो रहा भारी नुकसान?

SEBI के आंकड़ों के मुताबिक, इस घाटे का मुख्य कारण 'ऑप्शन बाइंग' (Option Buying) है, जिससे कुल नुकसान का करीब 92% हिस्सा आता है। करीब 97% रिटेल ट्रेडर्स तेजी से पैसा बनाने के चक्कर में छोटी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स में दांव लगाते हैं, जो अक्सर लॉटरी की तरह काम करते हैं और एक्सपायरी के करीब आते ही उनकी वैल्यू खत्म हो जाती है।

क्यों हार रहे हैं रिटेल ट्रेडर्स?

रिटेल ट्रेडर्स का मुकाबला उन बड़े इंस्टिट्यूशनल प्लेयर्स से है, जिनके पास हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) और कॉम्प्लेक्स एल्गोरिदम जैसे अत्याधुनिक हथियार हैं। प्रोफेशनल ट्रेडर्स के पास लो-कॉस्ट और बेहतर रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम होता है, जबकि रिटेल निवेशक अक्सर ओवरकॉन्फिडेंस या डर के चलते गलत फैसले ले बैठते हैं।

ट्रांजैक्शन कॉस्ट का दोहरा बोझ

नुकसान सिर्फ ट्रेडिंग से नहीं हो रहा, बल्कि ब्रोकरेज, टैक्स और एक्सचेंज चार्जेस भी रिटेलर्स की पूंजी को खा रहे हैं। साल FY22 से FY26 के बीच रिटेल ट्रेडर्स ने करीब ₹1 लाख करोड़ सिर्फ इन ट्रांजैक्शन कॉस्ट्स पर खर्च किए हैं।

क्या बाजार से घट रही है रुचि?

जोखिमों को देखते हुए अब संभलने के संकेत भी दिख रहे हैं। FY26 में एक्टिव F&O ट्रेडर्स की संख्या 20% घटकर 78.6 लाख रह गई है, वहीं नए आने वालों की संख्या में 40% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। माना जा रहा है कि रेगुलेटर जल्द ही वीकली एक्सपायरी और पात्रता मानकों को लेकर कड़े नियम ला सकते हैं ताकि रिटेल निवेशकों की जमा-पूंजी को सुरक्षित रखा जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.