इक्विटी डेरिवेटिव्स में सख्त रेगुलेशन और भारी नुकसान के बाद रिटेल ट्रेडर्स का झुकाव कमोडिटी मार्केट की ओर बढ़ा है। FY26 में MCX पर रिटेल पार्टिसिपेशन **61%** उछलकर **20.9 लाख** पहुंच गया है, जबकि NSE के इक्विटी सेगमेंट में ट्रेडर्स की संख्या में **20%** की गिरावट आई है।
वित्त वर्ष 2026 में रिटेल डेरिवेटिव ट्रेडिंग के मिजाज में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां एक तरफ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट से व्यक्तिगत ट्रेडर्स का मोहभंग हुआ है और उनकी संख्या 1.06 करोड़ से घटकर 85 लाख के करीब रह गई है, वहीं दूसरी ओर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) नया केंद्र बनकर उभरा है। MCX पर रिटेल पार्टिसिपेशन पिछले साल के 13 लाख से बढ़कर 20.9 लाख हो गया है।
रेगुलेटरी बदलावों का असर
इस शिफ्ट के पीछे मुख्य वजह SEBI का सख्त रुख है। नवंबर 2024 से इक्विटी डेरिवेटिव्स में सट्टेबाजी रोकने के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाने और पोजीशन लिमिट को सख्त करने जैसे कदम उठाए गए। इससे छोटे रिटेल ट्रेडर्स के लिए इक्विटी मार्केट में ट्रेडिंग करना महंगा और मुश्किल हो गया है। परिणामस्वरूप, FY26 में इक्विटी डेरिवेटिव्स में नए ट्रेडर्स के रजिस्ट्रेशन में लगभग 40% की गिरावट दर्ज की गई है।
इसके अलावा, आंकड़े बताते हैं कि FY26 में इक्विटी डेरिवेटिव्स में हाथ आजमाने वाले लगभग 87.7% रिटेल ट्रेडर्स को नुकसान हुआ है। इस सेगमेंट में निवेशकों को कुल ₹91,685 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जो ट्रेडर्स के हतोत्साहित होने का बड़ा कारण है।
कमोडिटी की ओर क्यों बढ़ रहा आकर्षण?
ट्रेडर्स अब क्रूड ऑयल, गोल्ड और सिल्वर जैसी कमोडिटीज में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। MCX का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसका देर रात तक चलने वाला ट्रेडिंग सेशन है, जो इक्विटी मार्केट बंद होने के बाद भी ट्रेडर्स को ग्लोबल हलचल पर रिएक्ट करने का मौका देता है। हाई-बीटा (High-beta) अवसर और ऑप्शंस ट्रेडिंग की सुविधा इसे शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट तलाशने वालों के लिए पसंदीदा बना रही है।
जोखिम और सतर्कता
हालांकि MCX में वॉल्यूम बढ़ रहा है, लेकिन निवेशकों को इसमें निहित जोखिमों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या SEBI आने वाले समय में कमोडिटी डेरिवेटिव्स के लिए भी वही सख्त नियम लागू करेगा, जो उसने इक्विटी के लिए किए हैं। साथ ही, कमोडिटी में हाई लेवरेज के कारण बड़े और तेज नुकसान की संभावना बनी रहती है। निवेशकों को सलाह है कि वे रेगुलेटरी अपडेट्स और एक्सचेंज की टेक्निकल स्टेबिलिटी पर कड़ी नजर बनाए रखें।
