MTF के जाल में फंसे निवेशक! मार्जिन बुक **₹1.48 लाख करोड़** के रिकॉर्ड स्तर पर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
MTF के जाल में फंसे निवेशक! मार्जिन बुक **₹1.48 लाख करोड़** के रिकॉर्ड स्तर पर

भारतीय रिटेल निवेशक अब इक्विटी डेरिवेटिव्स को छोड़कर मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। नतीजतन, MTF की मार्जिन बुक रिकॉर्ड **₹1.48 लाख करोड़** के स्तर पर पहुंच गई है, जो निवेशकों के लिए नए तरह के जोखिम पैदा कर रही है।

भारतीय शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों के लिवरेज इस्तेमाल करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। डेरिवेटिव्स सेगमेंट पर बढ़ती रेगुलेटरी सख्ती के बीच, पैसा अब मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) की तरफ शिफ्ट हो रहा है। अगस्त 2026 के मध्य तक MTF के तहत दिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा ₹1.48 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर को छू गया है, जो कि फाइनेंशियल ईयर 2023 के ₹24,920 करोड़ से कहीं ज्यादा है। हालांकि डेरिवेटिव्स में सक्रिय ट्रेडर्स की संख्या घटकर 78.60 लाख रह गई है, लेकिन यह साफ है कि निवेशकों की सट्टा खेलने की भूख खत्म नहीं हुई है, बस इंस्ट्रूमेंट बदल गया है।

लॉन्ग-टर्म लिवरेज की छिपी हुई लागत

ज्यादातर निवेशक MTF को डिलीवरी आधारित ट्रेड के लिए अपनी परचेजिंग पावर बढ़ाने का जरिया मानते हैं। लेकिन, इसमें लगने वाली 'कैरी कॉस्ट' को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। फ्यूचर्स और ऑप्शंस के विपरीत, जहां एक्सपायरी के कारण पोजीशन बंद करनी पड़ती है, MTF पोजीशन लंबे समय तक रखी जा सकती है। क्योंकि यह पैसा उधार पर होता है, इसलिए निवेशकों से सालाना लगभग 15% तक का ब्याज वसूला जाता है। यह ब्याज दर रिटर्न को धीरे-धीरे खत्म कर देती है, जिससे एक सामान्य निवेश भी समय के साथ घाटे का सौदा बन सकता है।

इलिक्विड एसेट्स का बड़ा रिस्क

मौजूदा मार्जिन कर्ज का एक बड़ा हिस्सा उन स्टॉक्स में लगा है जिनमें डेरिवेटिव्स उपलब्ध नहीं हैं, यानी मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियां। बाजार में गिरावट के दौरान इन स्टॉक्स में लिक्विडिटी का संकट हो सकता है। यदि कोई स्टॉक 'लोअर सर्किट' पर फंस जाए, तो ब्रोकर गिरवी रखे शेयरों को बेचकर अपना पैसा नहीं निकाल पाएगा। यह स्थिति निवेशक और ब्रोकर दोनों के लिए खतरनाक है।

रेगुलेटर की नजर

SEBI इस सेगमेंट में पारदर्शिता और स्थिरता लाने के लिए कड़े सुधारों पर विचार कर रहा है। इनमें ब्रोकरों के लिए नेट-वर्थ की बढ़ी हुई आवश्यकताएं और स्टैंडर्ड रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क शामिल हैं। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे अपनी होल्डिंग्स में लिक्विडिटी का ध्यान रखें और कर्ज की ब्याज दरों पर नजर रखें ताकि अचानक आई गिरावट में वे फंस न जाएं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.