Closing Auction Session: रिटेल निवेशकों ने बनाई दूरी, नया नियम बन रहा है मुसीबत?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Closing Auction Session: रिटेल निवेशकों ने बनाई दूरी, नया नियम बन रहा है मुसीबत?

3 अगस्त को शुरू हुए नए Closing Auction Session से रिटेल निवेशक किनारा करते नजर आ रहे हैं। इस विंडो में **10%** से भी कम रिटेल पार्टिसिपेशन देखा गया है, जिसकी मुख्य वजह अचानक आने वाली अस्थिरता और लिक्विडिटी की कमी है।

बाजार की अनिश्चितता और निवेशकों की चिंता

Closing Auction Session (CAS) को मार्केट के आखिर में ट्रांसपेरेंसी लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन रिटेल ट्रेडर्स अभी भी इससे दूर ही हैं। इस विंडो में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए बड़ा सिरदर्द बन गए हैं। इसका एक उदाहरण 26 अगस्त को देखने को मिला, जब Nifty 50 में अचानक 271.4 पॉइंट्स की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। Bharti Airtel जैसे स्टॉक्स में बड़े ऑर्डर्स के कारण आई इस अस्थिरता ने रिटेलर्स के भरोसे को हिला दिया है।

रेगुलेटरी एक्शन का दबाव

केवल कीमतों में उतार-चढ़ाव ही नहीं, बल्कि रेगुलेटरी एक्शन ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। हाल ही में SEBI ने इस मैकेनिज्म में हेरफेर के आरोप में Mansi Share and Stock Broking और Copthall Mauritius Investment पर ₹3.7 करोड़ का भारी जुर्माना लगाया है। इस तरह के मामलों ने बाजार में यह डर पैदा कर दिया है कि कम लिक्विडिटी वाली विंडो का फायदा उठाकर मार्केट मैनिपुलेशन हो सकता है।

घटता वॉल्यूम, बढ़ता डर

डेटा पर नजर डालें तो NSE पर क्लोजिंग ऑक्शन की ट्रांजैक्शन वैल्यू में लगातार गिरावट देखी जा रही है। लॉन्च के दिन यह आंकड़ा ₹1,276.38 करोड़ था, जो 26 अगस्त तक घटकर ₹1,085.13 करोड़ रह गया है। साफ है कि फिलहाल बड़े इंस्टीट्यूशनल प्लेयर्स ही इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि आम निवेशक लिक्विडिटी के लिहाज से सुरक्षित माने जाने वाले स्टैंडर्ड मार्केट आवर्स को ही तरजीह दे रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.