F&O में रिटेल निवेशकों को ₹91,685 करोड़ का नुकसान, SEBI के कड़े कदमों का असर

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AuthorNeha Patil|Published at:
F&O में रिटेल निवेशकों को ₹91,685 करोड़ का नुकसान, SEBI के कड़े कदमों का असर

भारत के डेरिवेटिव्स (F&O) बाजार में रिटेल निवेशकों को फाइनेंशियल ईयर 2026 में ₹91,685 करोड़ का नुकसान हुआ है। यह पिछले साल के ₹1.12 लाख करोड़ के मुकाबले एक बड़ी गिरावट है। SEBI द्वारा सट्टा ट्रेडिंग पर लगाम कसने के उपायों का असर साफ दिख रहा है, जिससे कैजुअल ट्रेडर्स की संख्या घटी है।

SEBI के एक्शन का असर, रिटेल नुकसान में भारी गिरावट

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के कड़े नियमों के बाद से भारतीय इक्विटी डेरिवेटिव्स (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) सेगमेंट में रिटेल निवेशकों के नुकसान में भारी कमी आई है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में यह नुकसान घटकर ₹91,685 करोड़ रह गया, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में यह ₹1.12 लाख करोड़ था। SEBI ने सट्टा ट्रेडिंग को नियंत्रित करने और छोटे निवेशकों को अत्यधिक जोखिम से बचाने के लिए कई नियामक कदम उठाए थे।

कम हुए निवेशक, लेकिन औसत नुकसान बढ़ा

संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, F&O सेगमेंट में एक्टिव रिटेल निवेशकों की संख्या FY25 में 98.10 लाख से घटकर FY26 में 78.60 लाख रह गई। हालांकि, भाग लेने वाले निवेशकों की कुल संख्या कम हुई, लेकिन जो निवेशक बाजार में बने रहे, उन्हें पहले से ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा। प्रति निवेशक औसत नुकसान बढ़कर ₹1,16,654 हो गया, जो पिछले साल ₹1,13,913 था। यह ट्रेंड दर्शाता है कि भले ही ट्रेडिंग करने वालों की संख्या कम हुई है, लेकिन बाजार में सक्रिय बचे हुए लोग शायद बड़े दांव लगा रहे हैं या बाजार की अस्थिरता के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।

SEBI ने कैसे कसे शिकंजे?

SEBI ने 2024 के अंत में सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए कई उपाय किए। इनमें इंडेक्स डेरिवेटिव्स के कॉन्ट्रैक्ट साइज को बढ़ाना, साप्ताहिक और मासिक एक्सपायरी उत्पादों की फ्रीक्वेंसी को तर्कसंगत बनाना, और ट्रेडर्स से एडवांस प्रीमियम वसूलना शामिल था। इन नियमों का उद्देश्य डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को कैजुअल पार्टिसिपेंट्स के लिए महंगा और कठिन बनाना था, जिससे उन लोगों को प्रभावी ढंग से बाहर किया जा सके जो ऐसे लीवरेज्ड इंस्ट्रूमेंट्स से जुड़े जोखिमों को पूरी तरह से नहीं समझते हैं।

टैक्स कलेक्शन और टर्नओवर में वृद्धि

रिटेल पार्टिसिपेंट्स की संख्या में कमी के बावजूद, डेरिवेटिव्स मार्केट में हलचल बनी हुई है। सरकार ने बताया कि F&O ट्रेडों से कलेक्ट किया गया सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) FY26 में बढ़कर ₹27,695 करोड़ हो गया, जो पिछले साल के ₹7,893 करोड़ से काफी ज्यादा है। इसके अलावा, संयुक्त नोटशनल टर्नओवर (लगाए गए दांवों का कुल मूल्य) 4.3% बढ़कर ₹110.4 लाख करोड़ हो गया। कम रिटेल ट्रेडर्स के बावजूद उच्च टैक्स राजस्व और बढ़े हुए टर्नओवर का यह संयोजन बताता है कि संस्थागत गतिविधि या शेष ट्रेडर्स द्वारा रखे गए पोजीशन का आकार अभी भी काफी महत्वपूर्ण है।

यह निष्कर्ष एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है कि F&O ट्रेडिंग स्वाभाविक रूप से एक उच्च जोखिम वाली गतिविधि है। प्रति व्यक्ति औसत नुकसान में वृद्धि से पता चलता है कि कड़े नियमों के बावजूद, पूंजी के क्षरण की संभावना महत्वपूर्ण बनी हुई है। निवेशकों को भविष्य के बाजार अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए कि क्या भागीदारी का स्तर स्थिर होता है या कम लेकिन अधिक सक्रिय ट्रेडर्स का ट्रेंड बाजार के व्यवहार को आकार देना जारी रखता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.