Rajasthan Commercial Tax Department ने दो महीने की जांच के बाद कारोबारियों से **₹2.51 करोड़** की रिकवरी की है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से फर्जी Input Tax Credit (ITC) दावों और इनवॉइस में गड़बड़ी को पकड़ने के लिए की गई है।
विभाग की सख्त कार्रवाई
राजस्व में हो रही लीकेज को रोकने के लिए Rajasthan Commercial Tax Department ने प्रदेश भर में चेकिंग अभियान तेज कर दिया है। पिछले दो महीनों में विभाग ने कई व्यावसायिक ठिकानों का ऑडिट किया, जिसमें करीब ₹2.85 करोड़ की टैक्स अनियमितताएं सामने आई हैं। अब तक विभाग ने ₹2.51 करोड़ की राशि वसूलने या उसे स्वैच्छिक रूप से वापस (Voluntary Reversal) करवाने में कामयाबी हासिल की है।
ITC और निर्माण कार्यों पर नजर
जांच का मुख्य केंद्र Input Tax Credit (ITC) के दावों की वैधता रही है। विशेष रूप से कंस्ट्रक्शन से जुड़े मामलों में, जहां GST कानून के तहत कई तरह की पाबंदियां हैं।
- Stubborn Resorts Private Limited (Jaipur): झोटवाड़ा में निर्माण कार्यों के लिए गलत तरीके से ITC क्लेम करने पर कंपनी ने ₹55.26 लाख वापस किए।
- AGRS Ventures LLP (Jaipur): अचल संपत्ति विकास से जुड़े अमान्य ITC दावों के कारण फर्म को ₹99.76 लाख का रिवर्सल करना पड़ा।
ट्रेड डॉक्यूमेंटेशन का ऑडिट
विभाग अब सेल्स और इन्वेंट्री के दस्तावेजों की भी गहन जांच कर रहा है। जयपुर, अजमेर, ब्यावर और फलौदी जैसे शहरों में टीमें डेटा का मिलान फिजिकल स्टॉक से कर रही हैं।
अजमेर की Assam Timber and Plywood पर बिना जरूरी टैक्स दस्तावेजों के माल बेचने का आरोप है, जिसके बाद विभाग ने वहां से रिकॉर्ड जब्त किए और ₹8 लाख की टैक्स अनियमितता पकड़ी। इसके अलावा, अजमेर की ही K C Agencies को 'कंपोजिशन स्कीम' के नियमों के उल्लंघन और अनिवार्य बिल जारी न करने के लिए घेरा गया है।
कारोबारियों के लिए सबक
यह कार्रवाई पूरे भारत में टैक्स अधिकारियों द्वारा डेटा एनालिटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाती है। GSTR रिटर्न का फिजिकल स्टॉक से मिलान होने के कारण अब गलतियां छिपना मुश्किल हो गया है। कारोबारियों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने टैक्स फाइलिंग की सटीकता और क्लेम किए गए क्रेडिट्स की वैधता सुनिश्चित करें, क्योंकि आने वाले समय में ऑडिट का दायरा और बढ़ सकता है।
