Polycab India: NCLAT से बड़ी राहत, दिवालिया कानून के गलत इस्तेमाल पर लगा ब्रेक

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AuthorAditya Rao|Published at:
Polycab India: NCLAT से बड़ी राहत, दिवालिया कानून के गलत इस्तेमाल पर लगा ब्रेक

Polycab India के निवेशकों के लिए राहत की खबर है। NCLAT ने कंपनी के खिलाफ चल रही दिवालिया कार्यवाही (Insolvency Proceedings) पर रोक लगा दी है। यह मामला **₹2.79 करोड़** के एक मामूली ऑपरेशनल डेट से जुड़ा था।

हाल ही में Polycab India को उस समय बड़ी कानूनी राहत मिली जब National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने कंपनी के खिलाफ शुरू की गई इनसॉल्वेंसी कार्यवाही पर स्टे लगा दिया। यह मामला अहमदाबाद बेंच द्वारा स्वीकार किया गया था और इसका मुख्य कारण Asier Metals की ओर से किया गया ₹2.79 करोड़ का ऑपरेशनल डेट क्लेम था।

सॉल्वेंट कंपनियों के लिए दिवालिया कानून का असर

निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि कंपनी के पास ₹4,000 करोड़ से ज्यादा का कैश रिजर्व है। इसका मतलब है कि Polycab पूरी तरह से एक कैश-रिच कंपनी है और दिवालिया होने का सवाल ही नहीं उठता। अक्सर छोटी कंपनियां या सप्लायर्स, IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) का उपयोग बड़े कॉर्पोरेट्स पर दबाव बनाने के लिए करते हैं, ताकि उनका पेमेंट जल्दी मिल सके। भले ही कंपनी फाइनेंशियली मजबूत हो, लेकिन ऐसी कानूनी कार्यवाही से मार्केट में अनिश्चितता पैदा होती है और कंपनी की साख (Reputation) पर असर पड़ता है।

कोर्ट का सख्त रुख

कोर्ट का मानना है कि IBC कानून का मकसद उन कंपनियों को राहत देना है जो सच में वित्तीय संकट में हैं, न कि इसे कर्ज वसूली का जरिया बनाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी Anjani Technoplast मामले में पहले साफ किया था कि इस कानून का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

हालाँकि, छोटे सप्लायर्स MSME Samadhaan जैसे अन्य पोर्टल्स के धीमे होने के कारण सीधे IBC का रुख कर रहे हैं, जो एक बड़ी चुनौती है। शेयरधारकों के लिए चिंता का विषय कानूनी खर्च और प्रशासनिक झमेले होते हैं, लेकिन हालिया न्यायिक सख्ती से उम्मीद है कि ऐसी घटनाओं में भविष्य में कमी आएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.