ICAI में कथित तौर पर जाति-आधारित भेदभाव और नौकरी से निकाले जाने के मामले में संसदीय समिति ने जांच शुरू कर दी है। समिति ने ICAI और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय को **5 अक्टूबर, 2026** तक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण पर बनी संसदीय समिति ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के खिलाफ जांच का औपचारिक आदेश जारी किया है। 22 सितंबर, 2026 को जारी इस मेमोरेंडम में समिति ने कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और ICAI से एक पूर्व अधिकारी की सेवा समाप्ति पर विस्तृत ब्यौरा मांगा है।
क्या है पूरा मामला?
यह जांच पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी जय नारायण राम की शिकायत के बाद शुरू हुई है। राम का आरोप है कि 17 अगस्त, 2026 को उनकी नौकरी सिर्फ इसलिए खत्म कर दी गई क्योंकि उन्होंने मानव संसाधन (HR) विभाग को अपने अनुसूचित जाति समुदाय से होने की जानकारी दी थी।
राम के अनुसार, अपनी पहचान उजागर करने के बाद उन्हें लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इसमें बार-बार डिपार्टमेंट बदलना, सालाना इंक्रीमेंट रोकना और प्रोबेशन पीरियड को जबरन बढ़ाना जैसे कदम शामिल थे, जो उन्हें नौकरी से बाहर करने की साजिश का हिस्सा थे।
अब आगे क्या?
ICAI देश में अकाउंटिंग मानक तय करने वाली प्रमुख संस्था है और यह कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन आती है। अब 5 अक्टूबर, 2026 तक संस्था को इन घटनाओं पर अपना पक्ष रखना होगा। यदि समिति को भर्ती प्रक्रियाओं या रिजर्वेशन पॉलिसी के पालन में खामियां मिलती हैं, तो संस्था के प्रशासनिक ढांचे में बड़े सुधार किए जा सकते हैं। इस घटना ने प्रोफेशनल निकायों में कॉरपोरेट गवर्नेंस और इक्विटी को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
