संसद की एक समिति ने FSSAI से लंबे समय से अटके 'फ्रंट-ऑफ-पैक' पोषण लेबल नियमों को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की मांग की है। साल **2022** से चल रही इस देरी के कारण उपभोक्ता हाई-शुगर वाले पैक्ड फूड पर चेतावनियां नहीं देख पा रहे हैं, जिससे बड़ी फूड और बेवरेज कंपनियों के लिए एक रेगुलेटरी बाधा पैदा हो गई है।
Detailed Coverage
FSSAI पर क्यों उठाया गया सवाल?
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) पर एक संसदीय स्थायी समिति ने फ्रंट-ऑफ-पैक पोषण लेबलिंग (FOPNL) नियमों को लागू करने में तेजी लाने का जोर दिया है। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर 2022 में ड्राफ्ट जारी होने के बाद से लगभग दो साल की देरी हो चुकी है। इस देरी की वजह से उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खरीदे जा रहे प्रोसेस्ड फूड में मौजूद पोषण संबंधी जानकारी आसानी से नहीं मिल पा रही है।
यह रेगुलेटरी देरी इसलिए भी अहम है क्योंकि 14,000 से अधिक हितधारकों की टिप्पणियों पर करीब दो साल से विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित लेबल का मकसद, उत्पाद की पैकेजिंग के पीछे दी जाने वाली तकनीकी, संख्यात्मक जानकारी से आगे बढ़कर एक आसान सिस्टम लाना है। समिति ने FSSAI को एक इंटरप्रिटेटिव सिस्टम अपनाने की सिफारिश की है, जैसे कि तीन-रंगों वाली स्कीम - लाल, पीला और हरा - जो एक नज़र में चीनी, नमक और वसा के स्तर को दर्शाएगी।
पैक्ड फूड बनाने वाली कंपनियों पर असर
निवेशकों के लिए, इन नियमों के संभावित कार्यान्वयन से FMCG सेक्टर की कंपनियों पर बड़ा असर पड़ सकता है। बिस्कुट, सॉफ्ट ड्रिंक, प्रोसेस्ड स्नैक्स और कन्फेक्शनरी बनाने वाली कंपनियां अक्सर अपने स्थापित प्रोडक्ट फॉर्मूले पर निर्भर करती हैं। अगर हाई-शुगर या हाई-सॉल्ट कंटेंट के लिए अनिवार्य चेतावनी लेबल लागू किए जाते हैं, तो कंपनियों पर दबाव आ सकता है कि वे या तो अपने प्रोडक्ट्स को स्वस्थ मानकों के अनुरूप री-फॉर्मूलेट करें या फिर उपभोक्ता की धारणा में संभावित बदलावों से निपटें।
ऐतिहासिक रूप से, अन्य वैश्विक बाजारों में ऐसे ही लेबलिंग बदलावों के कारण कंप्लायंस की लागत बढ़ी है और कुछ मामलों में, मार्केट शेयर स्वस्थ प्रोडक्ट पोर्टफोलियो की ओर खिसका है। जो कंपनियां पहले से ही चीनी और नमक की मात्रा को सक्रिय रूप से कम कर रही हैं, वे उन कंपनियों की तुलना में इन बदलावों के अनुकूल बेहतर स्थिति में हो सकती हैं जो हाई-शुगर वाले प्रोडक्ट कैटेगरी पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
निवेशकों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
रेगुलेटर और समिति की मुख्य चिंता भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की बढ़ती खपत और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को लेकर है। उद्योग की चिंताओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य जनादेश के बीच संतुलन बनाने की FSSAI की क्षमता एक प्रमुख जोखिम कारक है। निवेशकों को यह ट्रैक करना चाहिए कि FSSAI इस बदलाव का प्रबंधन कैसे करता है, जिसमें लेबल का अंतिम डिज़ाइन और अनुपालन की समय-सीमा शामिल है, क्योंकि ये कारक प्रमुख सूचीबद्ध खाद्य और पेय फर्मों की परिचालन लागत और मार्केटिंग रणनीतियों को सीधे प्रभावित करेंगे। भविष्य के अपडेट में संभवतः इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा कि क्या FSSAI कंपनियों को नियमों के अंतिम रूप से तैयार होने के बाद अपनी पैकेजिंग और प्रोडक्ट फॉर्मूलेशन को समायोजित करने के लिए एक संक्रमण अवधि प्रदान करता है।
