Parliamentary Standing Committee on Finance ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए 46 आर्थिक विषयों की समीक्षा तय की है। चेयरमैन Bhartruhari Mahtab की अध्यक्षता में यह पैनल डिजिटल एसेट (क्रिप्टो) रेगुलेशन और बैंकिंग में AI के इस्तेमाल पर खास नजर रखेगा।
बड़े नीतिगत बदलावों की तैयारी
Bhartruhari Mahtab की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय कमेटी ने अपनी कमर कस ली है। इस समीक्षा प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य सरकार और रेगुलेटर्स जैसे RBI और SEBI को भविष्य की नीतियों के लिए दिशा-निर्देश देना है। यह कदम फाइनेंशियल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है।
डिजिटल इकोनॉमी और निवेशकों पर असर
समिति का सबसे अहम फोकस 'वर्चुअल डिजिटल एसेट्स' यानी क्रिप्टो पर है। कमेटी यह तय करेगी कि क्या अब एक कड़े और स्थायी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की जरूरत है। साथ ही, बैंकिंग सेक्टर में Artificial Intelligence (AI) का दायरा और इसके जोखिमों पर भी मंथन होगा। जो कंपनियां और Fintech इंस्टीट्यूशंस ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके कामकाज के नियमों में भविष्य में बदलाव संभव है।
अन्य अहम एजेंडे
सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि समिति का दायरा काफी विस्तृत है:
- टैक्स रिफॉर्म्स: GST और डायरेक्ट टैक्स स्ट्रक्चर की समीक्षा।
- कॉरपोरेट गवर्नेंस: NCLT की कार्यक्षमता और ऑडिटर्स की जवाबदेही तय करना।
- आर्थिक ढांचा: पब्लिक सेक्टर एसेट मोनेटाइजेशन और Ministry of Statistics द्वारा मैनेज किए जाने वाले डेटा की जांच।
यह प्रक्रिया एक परामर्श का हिस्सा है, जहां एक्सपर्ट्स और सरकारी अधिकारियों के साथ नीतिगत कमियों पर चर्चा की जाएगी। हालांकि ये सिफारिशें तुरंत कानून नहीं बनतीं, लेकिन इनके आधार पर आने वाले समय में बड़े लेजिस्लेटिव बदलाव और रेगुलेटरी निर्देश जारी किए जा सकते हैं। निवेशकों को कमेटी की आने वाली रिपोर्ट्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये सरकारी रुख का संकेत देंगी।
