IPO बूम जारी: 240+ कंपनियां आईपीओ लाने की कतार में, शेयर बाज़ार में हलचल तेज

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AuthorAditya Rao|Published at:
IPO बूम जारी: 240+ कंपनियां आईपीओ लाने की कतार में, शेयर बाज़ार में हलचल तेज

भारतीय शेयर बाज़ार में आईपीओ (IPO) का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। फिलहाल **175** कंपनियां सेबी (SEBI) की मंजूरी के साथ तैयार हैं, वहीं **70** और कंपनियां कतार में हैं। डोमेस्टिक इनफ्लो (Domestic Inflows) और मिड-साइज़्ड (Mid-sized) पेशकशों में बढ़ती रुचि इस समय फंड जुटाने के ट्रेंड को आकार दे रही है। निवेशक अब बाज़ार की भावना से प्रेरित लिस्टिंग के बजाय, स्पष्ट आय (Earnings Visibility) वाली कंपनियों को ज़्यादा अहमियत दे रहे हैं।

Detailed Coverage

आईपीओ बाज़ार में दिख रही है मजबूती

भारतीय इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) बाज़ार में गजब की मजबूती बनी हुई है। स्टॉक एक्सचेंज पर डेब्यू (Debut) करने की तैयारी कर रही कंपनियों की एक बड़ी पाइपलाइन (Pipeline) मौजूद है। आंकड़े बताते हैं कि 175 फर्मों के पास अभी उनके ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस (Draft Prospectuses) के लिए वैध सेबी (SEBI) की ऑब्जर्वेशन (Observations) हैं, जबकि 70 और कंपनियां नियामक (Regulatory) मंजूरी का इंतज़ार कर रही हैं। यह हलचल उन कॉरपोरेशन्स (Corporations) के बीच बढ़ते भरोसे को दर्शाती है जो पब्लिक लिस्टिंग के ज़रिए पूंजी जुटाना चाहते हैं।

मार्केट की चाल और फंड जुटाने के ट्रेंड

साल की शुरुआत में थोड़ी अस्थिरता (Volatility) के बाद, प्राइमरी मार्केट (Primary Market) में लगातार इश्यू (Issue) आ रहे हैं। चालू फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) में, मेनबोर्ड सेगमेंट (Mainboard Segment) में डील्स (Deals) की संख्या और जुटाई गई कुल पूंजी, दोनों के मामले में तीन साल का शिखर (Peak) हासिल किया है। हालांकि सितंबर 2025 के रिकॉर्ड के बाद से फंड जुटाने के स्तरों में उतार-चढ़ाव देखा गया है, लेकिन बाज़ार विस्तार (Expansion) के लिए पूंजी चाहने वाली कंपनियों का समर्थन कर रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) सेक्टर इस मामले में सबसे आगे रहा है, जहाँ लगभग 72% फंड्स मौजूदा शेयरधारकों की बिकवाली की बजाय नए प्रोजेक्ट्स में लगाए गए। इसके विपरीत, आईटी (IT), टेक्नोलॉजी (Technology) और टेलीकॉम (Telecom) सेक्टरों ने मुख्य रूप से ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale) रूट का सहारा लिया है, जिससे इन सेगमेंट्स में जुटाई गई धनराशि का लगभग 79% हिस्सा आया।

निवेशकों की बदलती पसंद

नए लिस्टिंग (Listing) को लेकर निवेशकों के नज़रिए में एक स्पष्ट बदलाव आया है। पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि मिड-साइज़्ड आईपीओ, खासकर वे जो ₹1,000 करोड़ से ₹1,500 करोड़ के बीच फंड जुटाने का लक्ष्य रखते हैं, उन्होंने निवेशकों के लिए सबसे लगातार लाभ (Gains) दिया है। यह उन पुराने ट्रेंड्स से एक अलग बदलाव है जहां छोटी, भावना-संचालित आईपीओ की बहुत मांग थी। निवेशक अब उन कंपनियों को ज़्यादा महत्व दे रहे हैं जो स्थिर आय (Stable Earnings) और स्पष्ट बिज़नेस फंडामेंटल्स (Business Fundamentals) का प्रदर्शन कर सकती हैं। व्यवहार में यह बदलाव बताता है कि बाज़ार के प्रतिभागी (Participants) ज़्यादा चुनिंदा (Selective) हो रहे हैं, जो लिस्टिंग डे के उत्साह से आगे बढ़कर व्यवसायों के अंतर्निहित मूल्य (Underlying Value) पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

एंकर इन्वेस्टर्स (Anchor Investors) की भूमिका

पिछले एक साल में भारतीय आईपीओ स्पेस में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (Foreign Portfolio Investors) सबसे बड़े एंकर प्रतिभागी बने हुए हैं, जिन्होंने नई पेशकशों में ₹40,000 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया है। डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड्स (Domestic Mutual Funds) भी सक्रिय रहे हैं, जिन्होंने इन इश्यू की स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि बीमा कंपनियों (Insurance Companies) और वित्तीय संस्थानों (Financial Institutions) जैसे अन्य खिलाड़ी भी भाग ले रहे हैं, उनके निवेश अक्सर विशिष्ट यील्ड टारगेट्स (Yield Targets) और बैलेंस शीट (Balance Sheet) की बातों से निर्देशित होते हैं। जैसे-जैसे 240 से अधिक कंपनियों की पाइपलाइन संभावित लिस्टिंग की ओर बढ़ रही है, इन व्यवसायों की एंकर सपोर्ट (Anchor Support) हासिल करने और परिचालन प्रदर्शन (Operational Performance) के ज़रिए अपने मूल्यांकन (Valuations) को सही ठहराने की क्षमता आने वाली तिमाहियों में निवेशकों के लिए निगरानी का एक प्रमुख कारक बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.