Options Trading: नेकेड शॉर्टिंग का खतरनाक सच, कहीं डूब न जाए आपकी मेहनत की कमाई

SEBIEXCHANGE
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Options Trading: नेकेड शॉर्टिंग का खतरनाक सच, कहीं डूब न जाए आपकी मेहनत की कमाई

रिटेल ट्रेडर्स अक्सर ऑप्शन सेलिंग को आसान कमाई का जरिया मान लेते हैं, लेकिन नेकेड शॉर्टिंग (Naked Shorting) में छिपा अनियंत्रित रिस्क आपकी पूरी कैपिटल को एक झटके में खत्म कर सकता है।

बहुत से रिटेल ट्रेडर्स को लगता है कि ऑप्शन बेचना यानी 'नेकेड शॉर्टिंग' एक सेफ और हाई-प्रोबेबिलिटी गेम है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का डेटा भी कुछ ऐसा ही इशारा करता है, जिसके अनुसार करीब 85% कॉन्ट्रैक्ट्स एक्सपायरी तक आउट-ऑफ-द-मनी हो जाते हैं और सेलर को प्रीमियम मिल जाता है। लेकिन यही गणित अक्सर एक बड़े जाल की तरह काम करता है।

रिस्क का गणित (Risk Asymmetry)

नेकेड शॉर्टिंग में आपका मुनाफा तो सीमित (प्रीमियम जितना) होता है, लेकिन नुकसान की कोई सीमा नहीं होती। जब बाजार में अचानक बड़ी वोलैटिलिटी (Volatility) आती है, तो एक ही ट्रेड आपके पिछले कई महीनों की कमाई को जीरो कर सकता है। यह छोटे मुनाफों और बड़े नुकसान का एक दुष्चक्र है, जो ट्रेडर्स को एक झूठी सुरक्षा का अहसास कराता है।

रेगुलेटर की चेतावनी (Regulatory Stance)

SEBI ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि डेरिवेटिव सेगमेंट में रिटेल ट्रेडर्स का एक बड़ा हिस्सा नुकसान उठा रहा है। यही कारण है कि अब रिटेल पार्टिसिपेशन पर सख्ती बढ़ रही है। प्रोफेशनल ट्रेडर्स कभी भी नेकेड पोजीशन नहीं छोड़ते; वे 'Spread Strategies' जैसे कि Bull Call Spreads या Bear Put Spreads का इस्तेमाल करते हैं ताकि अपना रिस्क फिक्स कर सकें।

सही अप्रोच क्या है?

डेटा बताता है कि करीब 70% डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स एक्सपायरी से पहले ही क्लोज कर दिए जाते हैं, जो यह दिखाता है कि मार्केट में सक्रिय मैनेजमेंट जरूरी है। याद रखें, मार्केट में जीतने की दर (Win rate) से ज्यादा महत्वपूर्ण है आपका Risk-to-Reward Ratio। बिना स्टॉप-लॉस और हेजिंग के ट्रेड करना मार्केट में अपनी बर्बादी को न्यौता देने जैसा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.