Nifty50 पिछले एक दशक के अपने सबसे कमजोर प्रदर्शन की ओर है। बाजार में **13%** की गिरावट देखी गई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ग्लोबल फैक्टर्स के बीच नवंबर सीरीज में रिकवरी की उम्मीदों पर सस्पेंस बना हुआ है।
भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स Nifty50 के लिए अक्टूबर का महीना काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। इस साल अब तक इंडेक्स 13% फिसल चुका है, जो पिछले दस सालों में इसका सबसे खराब प्रदर्शन है। नवंबर सीरीज की शुरुआत के साथ ही निवेशक बाजार में किसी बड़े टर्नअराउंड की तलाश में हैं, लेकिन फिलहाल मार्केट का रुख काफी सतर्क है।
टेक्निकल लेवल पर नजर
अक्टूबर की डेरिवेटिव्स सीरीज बिना किसी ठोस दिशा के खत्म हुई है। बाजार अभी भी कंसोलिडेशन के दौर में है। हालांकि इंडेक्स ओवरसोल्ड जोन में है, लेकिन जानकारों का मानना है कि रिकवरी अभी कमजोर है। मार्केट में तेजी के लिए 23,480 से 23,500 के रेजिस्टेंस लेवल को पार करना बेहद जरूरी है। इसके ऊपर टिकने के बाद ही बाजार में नई जान फूँक सकती है।
FIIs की रणनीति में बदलाव
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs), जो इस साल बाजार में मुख्य रूप से बिकवाल रहे हैं, अब अपनी पोजीशन बदल रहे हैं। अक्टूबर के दौरान उन्होंने Nifty फ्यूचर्स में अपने शॉर्ट पोजीशन को 267,000 कॉन्ट्रैक्ट्स से घटाकर 221,000 कर दिया है। यह इस बात का संकेत है कि आक्रामक बिकवाली कम हो रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे फिर से बड़ी खरीदारी करने लगे हैं। वे अब ब्रॉड मार्केट के बजाय चुनिंदा स्टॉक्स पर दांव लगा रहे हैं।
ग्लोबल चुनौतियां और मौके
भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक देश है, इसलिए तेल की कीमतों में अस्थिरता का असर सीधे कॉर्पोरेट मुनाफे और फिस्कल बैलेंस पर पड़ रहा है। इसके अलावा, ग्लोबल स्तर पर AI-लिंक्ड एसेट्स की तरफ फंड्स का झुकाव बढ़ने से इमर्जिंग मार्केट्स पर दबाव है।
हालांकि, बाजार में IT सेक्टर एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। अक्टूबर सीरीज में IT स्टॉक्स ने 16.3% का शानदार रिटर्न दिया है, जिसने अन्य सेक्टरों के नुकसान की भरपाई में मदद की है। वहीं, ऑटो, मेटल और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में निवेशक अभी भी डिफेंसिव रुख अपनाए हुए हैं। अब बाजार की नजर नवंबर सीरीज के दौरान आने वाले तिमाही नतीजों और विदेशी प्रवाह पर टिकी है।
