ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार एक सीमित दायरे में फंस गए हैं। US में बॉन्ड यील्ड के **5.1%** के स्तर को पार करने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे Nifty के **23,200** और Bank Nifty के **55,700** के सपोर्ट लेवल पर सबकी नजरें टिकी हैं।
ग्लोबल हेडविंड्स और घरेलू बाजार
Nifty 50 और Bank Nifty दोनों ही इंडेक्स सुस्ती के दौर से गुजर रहे हैं। बाजार पर इस वक्त ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर का भारी असर दिख रहा है। US की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.1% से ऊपर जाना सबसे बड़ी टेंशन है, क्योंकि इससे उभरते हुए बाजारों (Emerging Markets) से विदेशी निवेश बाहर निकलने का डर बना रहता है। साथ ही, ब्रेंट क्रूड ऑयल का $100 प्रति बैरल के करीब पहुंचना भारत जैसे देशों के लिए एक बड़ा रिस्क है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ती है और कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ता है।
Nifty के लिए टेक्निकल संकेत
टेक्निकल चार्ट्स पर Nifty 50 फिलहाल मोमेंटम की कमी से जूझ रहा है। इंडेक्स के लिए 23,200 का लेवल एक अहम सपोर्ट फ्लोर है। अगर इंडेक्स इससे नीचे फिसलते हैं, तो बिकवाली का दबाव 23,000 तक बढ़ सकता है। वहीं ऊपरी स्तरों पर 23,500 से 23,600 के जोन में तगड़ा रेजिस्टेंस (सीलिंग) बना हुआ है। ट्रेडिंग वॉल्यूम काफी कम है, जो साफ बताता है कि बड़े निवेशक किसी नए ग्लोबल ट्रिगर का इंतजार कर रहे हैं।
Bank Nifty का हाल
Bank Nifty पिछले 10 सत्रों से 1,300 पॉइंट्स के दायरे में फंसा हुआ है। इंडेक्स के लिए 57,000 का स्तर एक बड़ी बाधा बना हुआ है, जिसे पार करने के बाद ही इसमें बुलिश तेजी देखने को मिल सकती है। नीचे की तरफ 55,700 से 55,800 का दायरा क्रिटिकल सपोर्ट के तौर पर काम कर रहा है। फिलहाल पुट-कॉल रेशियो (PCR) न्यूट्रल है, जो मार्केट में कंसोलिडेशन फेज को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए सलाह
मौजूदा माहौल में रिस्क मैनेजमेंट सबसे जरूरी है। जब ब्याज दरें ऊंची हों और एनर्जी की कीमतें अस्थिर हों, तो लिक्विडिटी में गिरावट आती है। ऐसे में कई निवेशक डिफेंसिव सेक्टर्स की ओर रुख कर रहे हैं। अगले कुछ सत्रों में US ट्रेजरी यील्ड की चाल और घरेलू इंडेक्स का सपोर्ट लेवल पर टिके रहना सबसे महत्वपूर्ण मॉनिटर करने योग्य बातें होंगी।
