26 अगस्त, 2026 को Nifty 50 में क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान अचानक **271 अंकों** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह Bharti Airtel में हुआ एक बड़ा लो-प्राइस ट्रेड माना जा रहा है, जिसे 'फैट-फिंगर' एरर (human input error) बताया जा रहा है।
क्या हुआ था मार्केट में?
बुधवार को दोपहर 3:20 PM पर क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) शुरू होते ही बाजार में हड़कंप मच गया। बेंचमार्क इंडेक्स Nifty 50 अपने 3:15 PM के रेफरेंस लेवल 24,276.9 से गिरकर 24,005.5 के निचले स्तर पर आ गया। हालांकि, बाजार ने बाद में संभलते हुए दिन का अंत 24,207.75 पर किया, जो कि पिछली क्लोजिंग के मुकाबले 0.52% की गिरावट थी।
क्यों हुआ इतना बड़ा उतार-चढ़ाव?
इस उठा-पटक के पीछे Bharti Airtel के शेयरों में हुआ भारी वॉल्यूम वाला ट्रेड जिम्मेदार है। डेटा के अनुसार, इस शेयर का सेल ऑर्डर ₹1,857.7 पर मैच हुआ, जो इसके रेफरेंस प्राइस ₹1,915.1 से 3% कम था। SEBI के नियमों के मुताबिक, निवेशक रेफरेंस प्राइस के 3% बैंड में लिमिट ऑर्डर लगा सकते हैं, इसलिए यह ट्रेड तकनीकी रूप से नियमों के दायरे में था। लेकिन, इतनी बड़ी मात्रा में इतने निचले स्तर पर सेलिंग ने मार्केट को चौंका दिया।
नया क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम और उसकी चुनौतियां
भारतीय बाजारों में 3 अगस्त, 2026 से यह नया ऑक्शन सिस्टम लागू हुआ था ताकि क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी बनाया जा सके। चूंकि सिस्टम अभी नया है और आखिरी मिनटों में रिटेल निवेशकों या आर्बिट्राज फंड्स की भागीदारी कम रहती है, इसलिए बड़े ऑर्डर्स का असर इंडेक्स पर बहुत गहरा पड़ता है।
निवेशकों के लिए सबक
मार्केट एक्सपर्ट्स इसे 'फैट-फिंगर' एरर यानी मानवीय गलती मान रहे हैं। यह घटना क्लोजिंग ऑक्शन में मौजूद तरलता (Liquidity) की कमी को उजागर करती है। जब बाजार में कम पार्टिसिपेंट्स होते हैं, तो एक बड़ा ऑर्डर भी इंडेक्स में बड़ी अस्थिरता पैदा कर सकता है। अब निवेशकों की नजर National Stock Exchange (NSE) द्वारा इस सिस्टम में सुधार के लिए लिए जाने वाले संभावित फैसलों पर टिकी है।
