भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन सुस्ती रही। कारोबार के आखिरी घंटों में भारी बिकवाली के चलते Nifty फिसलकर **22,620** के स्तर पर बंद हुआ। राहत की बात यह रही कि बैंकिंग शेयरों ने मोर्चा संभाले रखा, लेकिन बाजार की चौतरफा कमजोरी का आलम यह था कि **120** से ज्यादा कंपनियों के शेयर अपने **52-वीक लो (52-week low)** पर पहुंच गए।
बाजार की चाल और दबाव
30 सितंबर, 2026 को भारतीय शेयर बाजार के लिए दिन मिला-जुला रहा। सत्र की शुरुआत में Nifty 50 ने 22,800 के स्तर को छूने की कोशिश की, लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिक नहीं सका। कारोबार खत्म होते-होते बिकवाली हावी हो गई और इंडेक्स 22,620.45 पर आकर थमा।
सेक्टर का हाल
बाजार में आज डिफेंसिव और साइक्लिकल सेक्टर के बीच एक स्पष्ट अंतर दिखा। बैंकिंग सेक्टर मजबूती के साथ खड़ा रहा, जहाँ ICICI Bank और Kotak Mahindra Bank की बदौलत Nifty Bank इंडेक्स 0.69% की बढ़त बनाने में कामयाब रहा। दूसरी ओर, निवेशकों ने मेटल और फार्मा सेक्टर से अपना पैसा निकालना सही समझा, जिससे Nifty Metal और Nifty Pharma इंडेक्स में 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
बड़े खतरे का संकेत
मार्केट में असली चिंता का विषय 120 से अधिक शेयरों का 52-वीक लो छूना है। इसमें Britannia Industries, Voltas और Wipro जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। जब बेंचमार्क इंडेक्स स्थिर दिखते हैं लेकिन बड़ी संख्या में शेयर अपने सालाना निचले स्तरों पर होते हैं, तो यह बाजार में खरीदारी के घटते भरोसे का स्पष्ट संकेत माना जाता है।
टेक्निकल आउटलुक
तकनीकी नजरिए से देखें तो 22,800 का स्तर bulls के लिए एक मजबूत रेजिस्टेंस (Resistance) बन गया है। अब मार्केट की निगाहें साइकोलॉजिकल सपोर्ट लेवल 22,500 पर टिकी हैं। अगर इंडेक्स इस सपोर्ट को बचाने में नाकाम रहता है, तो यह 22,100 से 22,200 की रेंज तक फिसल सकता है। फिलहाल निवेशकों को बैंकिंग सेक्टर की मजबूती और चौतरफा बिकवाली के बीच के इस तालमेल पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
