ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव में Nifty 50 इंडेक्स **23,800** के अहम सपोर्ट को तोड़कर **23,779** पर बंद हुआ है। इंडेक्स अपने अगस्त के ऊपरी स्तर से अब तक **1,000** अंकों से ज्यादा गिर चुका है।
भारी बिकवाली का दौर
भारतीय शेयर बाजार इस समय चौतरफा दबाव में है। अगस्त के अपने पीक स्तर 24,774 से फिसलते हुए Nifty 50 अब 23,779.15 के स्तर पर आ गया है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण Foreign Institutional Investors (FIIs) का आक्रामक रुख है। आंकड़ों के मुताबिक, FIIs ने इंडेक्स फ्यूचर्स में ₹2.77 लाख करोड़ की नेट शॉर्ट पोजीशन बनाई है, जो यह दर्शाता है कि बड़े निवेशक फिलहाल बाजार में रिकवरी की उम्मीद नहीं कर रहे हैं और गिरावट पर दांव लगा रहे हैं।
ग्लोबल संकट और कच्चे तेल का दबाव
घरेलू बाजार की मुश्किलों को ग्लोबल फैक्टर्स और भी गंभीर बना रहे हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें $97 प्रति बैरल के पार चली गई हैं। भारत के लिए, जो अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, क्रूड में यह उछाल महंगाई और कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर डालता है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े जोखिमों के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
टेक्निकल आउटलुक
तकनीकी चार्ट्स पर बाजार का स्ट्रक्चर काफी कमजोर दिख रहा है। 23,800 का लेवल टूटने के बाद अब ट्रेडर्स की नजर 23,600 के ऐतिहासिक सपोर्ट पर है। बाजार में 'लोअर हाइज' और 'लोअर लोज' का पैटर्न बना हुआ है, जो मंदी के हावी रहने का संकेत है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर हैं कि क्या FIIs अपनी भारी-भरकम शॉर्ट पोजीशन को कवर करना शुरू करते हैं या नहीं, क्योंकि उनकी शॉर्ट अनवाइंडिंग ही बाजार में कोई बड़ी रिकवरी ला सकती है।
