ग्लोबल दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण अगस्त में भारतीय शेयर बाजार की रफ्तार धीमी पड़ गई। Nifty 50 और Sensex ने दो महीने की तेजी के बाद लाल निशान में क्लोजिंग दी, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने अपनी बढ़त बरकरार रखी। वहीं, प्राइमरी मार्केट में बहार रही और कंपनियों ने IPO के जरिए **₹21,000 करोड़** से ज्यादा जुटाए।
अगस्त के महीने में भारतीय इक्विटी मार्केट में थोड़ी सुस्ती देखी गई। Nifty 50 और Sensex में क्रमशः 1.2% और 1.5% की गिरावट दर्ज की गई, जिसने पिछले दो महीनों की लगातार बढ़त पर ब्रेक लगा दिया। बाजार के इस मूड बिगड़ने के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक मुख्य रहे, जिसने ग्लोबल इन्वेस्टर्स का भरोसा डगमगाया।
मिडकैप और स्मॉलकैप की जबरदस्त चाल
जहां दिग्गज शेयरों (Large-caps) में गिरावट दिखी, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट ने गजब की मजबूती दिखाई है। इन सेगमेंट ने लगातार पांचवें महीने पॉजिटिव रिटर्न दिया है, जो क्रमशः 2.1% और 3.1% ऊपर बंद हुए। यह साफ दर्शाता है कि घरेलू निवेशकों का छोटे शेयरों में भरोसा अभी भी अटूट है। अगस्त के अंत तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹490 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
रिकॉर्ड IPO और नए ट्रेडिंग रूल्स
अगस्त का महीना प्राइमरी मार्केट के लिए 2026 का सबसे व्यस्त महीना रहा। इस दौरान 21-22 मेनबोर्ड IPO आए, जिन्होंने कुल ₹21,000 करोड़ से अधिक की पूंजी जुटाई। Tempsens Instruments (India) Ltd. की लिस्टिंग ने तो कमाल ही कर दिया, जिसका शेयर अपने ₹300 के इश्यू प्राइस से 111% से ज्यादा उछल गया।
हालांकि, बाजार में एक बड़ा बदलाव भी देखने को मिला। 3 अगस्त को एक्सचेंजों ने 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) शुरू किया। हालांकि इसका उद्देश्य कीमतों को स्टेबल रखना है, लेकिन 27 अगस्त की डेरिवेटिव्स एक्सपायरी पर इसकी वजह से काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों को अब सेकेंडरी मार्केट की वोलेटिलिटी और IPO की बढ़ती पाइपलाइन के बीच बैलेंस बनाकर चलना होगा। बड़ी संख्या में नए लिस्टिंग से बाजार की लिक्विडिटी पर दबाव पड़ सकता है। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों और नई ट्रेडिंग प्रणाली के कारण होने वाले इंट्राडे उतार-चढ़ाव पर बारीक नजर रखने की जरूरत है।
