विदेशी निवेशकों (FIIs) ने डेरिवेटिव मार्केट में अपनी मंदी की पोजीशन को काफी बढ़ा दिया है। Nifty फ्यूचर्स का ओपन इंटरेस्ट 5 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। बढ़ती ग्लोबल क्रूड ऑयल कीमतों और US बॉन्ड यील्ड के चलते Nifty 50 में **3.7%** की गिरावट दर्ज की गई है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में अपनी मंदी की पोजीशन को आक्रामक तरीके से बढ़ाना शुरू कर दिया है, जो सितंबर सीरीज के लिए मार्केट सेंटीमेंट में बड़े बदलाव का संकेत है। आंकड़ों के अनुसार, इस महीने के पहले 11 ट्रेडिंग सत्रों में इन निवेशकों ने ₹14,477 करोड़ के इंडेक्स फ्यूचर्स नेट बेचे हैं। इस लगातार बिकवाली ने Nifty फ्यूचर्स के कुल ओपन इंटरेस्ट को अप्रैल 2026 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है, जहां 8:1 का शॉर्ट-टू-लॉन्ग रेशियो यह बता रहा है कि बड़े ट्रेडर्स आने वाले दिनों में और अधिक उतार-चढ़ाव (Volatility) के लिए तैयार हैं।\n\nइस बिकवाली का सीधा असर Nifty 50 पर दिख रहा है, जो अपने हालिया पीक से 3.7% लुढ़क चुका है। इस दबाव के पीछे मुख्य वजह ग्लोबल फैक्टर्स हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं, जिससे महंगाई बढ़ने और आयात का खर्च बढ़ने का डर पैदा हो गया है। साथ ही, US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के साल 2023 के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से उभरते बाजारों (Emerging Markets) की चमक फीकी पड़ रही है।\n\n### टेक्निकल लेवल्स पर रखें नजर (Technical Outlook)\n\nबाजार की दिशा समझने के लिए अब टेक्निकल सपोर्ट जोन बहुत महत्वपूर्ण हो गए हैं। Nifty 9 सितंबर को 23,431.50 पर बंद हुआ था। टेक्निकल एनालिस्ट्स 23,379 (12 मई का स्विंग लो) को पहले सपोर्ट के तौर पर देख रहे हैं, जबकि दूसरा अहम सपोर्ट 23,123 पर स्थित है। यदि इंडेक्स इन लेवल्स को नहीं बचा पाता, तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। ऊपर की ओर रिकवरी के लिए 23,767 का लेवल एक बड़ी बाधा (Resistance) का काम करेगा।\n\nफिलहाल बाजार में FIIs बनाम घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के बीच रस्साकशी चल रही है। जहां विदेशी निवेशक इंडेक्स को शॉर्ट कर रहे हैं, वहीं घरेलू निवेशक कभी-कभी सहारा दे रहे हैं। आने वाले सत्रों में ग्लोबल ऑयल कीमतें और US बॉन्ड यील्ड पर नजर रखना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है।
