ग्लोबल मार्केट में जारी बिकवाली के बावजूद Nifty 50 ने अपनी मजबूती बरकरार रखी है। विदेशी निवेशकों (FIIs) की जोरदार खरीदारी के चलते इंडेक्स लगातार सातवें सत्र में तेजी के साथ **24,600** के ऊपर कारोबार कर रहा है।
विदेशी निवेशकों का भरोसा और मार्केट की रफ्तार
भारतीय बाजार की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ Foreign Institutional Investors (FIIs) का है। केवल 5 नवंबर को FIIs ने बाजार में करीब ₹15,000 करोड़ का निवेश किया है। इस भारी लिक्विडिटी के कारण भारतीय बाजार ग्लोबल मार्केट की नकारात्मकता से अलग अपनी राह पर चल रहा है। अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में जहां उठापटक मची है, वहीं Nifty ने 24,600 के स्तर पर अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है।
25,000 की चुनौती और रिस्क
मार्केट अब एक मनोवैज्ञानिक बाधा यानी 25,000 के करीब पहुंच रहा है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो Relative Strength Index (RSI) यह दर्शा रहा है कि बाजार में तेजी बहुत तेज है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि इतनी तेज रैली के बाद निवेशकों में मुनाफावसूली (Profit-booking) का मूड बन सकता है, जिससे बाजार में थोड़े समय के लिए सुस्ती देखने को मिल सकती है।
कच्चे तेल की चिंता (Crude Oil Headwinds)
तकनीकी स्तरों के अलावा, निवेशकों को ऊर्जा सेक्टर पर भी नजर रखनी होगी। Brent कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, क्योंकि इससे इंपोर्ट बिल बढ़ता है और महंगाई का दबाव भी पैदा होता है। अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो ऑयल-मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन और बिजनेस की लागत पर असर पड़ना तय है।
आगे क्या होगा?
आने वाले सत्रों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Nifty 25,000 के स्तर को पार कर पाता है। निवेशकों को मुख्य रूप से FIIs के फ्लो और ग्लोबल बाजार की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, इंडेक्स की बड़ी कंपनियों (Index Heavyweights) की कमेंट्री और कच्चे तेल की कीमतों के रोजाना अपडेट्स बाजार की दिशा तय करेंगे।
