Nifty F&O Expiry: नई क्लोजिंग ऑक्शन से बाजार में बढ़ी घबराहट, क्या आज होगा बड़ा उलटफेर?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Nifty F&O Expiry: नई क्लोजिंग ऑक्शन से बाजार में बढ़ी घबराहट, क्या आज होगा बड़ा उलटफेर?

आज, 4 अगस्त को Nifty F&O एक्सपायरी के दिन भारतीय शेयर बाज़ार में हलचल देखने को मिल सकती है। वजह है नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का नया 20 मिनट का क्लोजिंग ऑक्शन सेशन। इस नए नियम ने हाल ही में ट्रेडिंग के आखिरी पलों में बड़ी उथल-पुथल मचाई थी और अब यह ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट वैल्यू को भी प्रभावित कर रहा है। जानकारों का मानना है कि बाजार को इस नए सिस्टम के साथ तालमेल बिठाने में अभी समय लगेगा।

नए ऑक्शन सिस्टम का क्या है असर?

Nifty 50 आज एक ऐसे मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी की ओर बढ़ रहा है, जो संभावित रूप से अस्थिर (Volatile) हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रेडर्स नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के नए लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के अभ्यस्त हो रहे हैं। यह नया नियम, जो सोमवार को ही लागू हुआ है, इंडेक्स की क्लोजिंग प्राइस की गणना के तरीके में बदलाव लाया है। इसके चलते ट्रेडिंग के आखिरी मिनटों में अप्रत्याशित प्राइस मूवमेंट देखे गए।

पहले क्लोजिंग प्राइस की गणना सेशन के आखिरी 30 मिनट के ट्रेड वॉल्यूम के औसत (Volume-Weighted Average) के आधार पर होती थी। लेकिन नए सिस्टम में, दोपहर 3:15 बजे IST से शुरू होने वाले 20 मिनट के एक समर्पित ऑक्शन पीरियड का इस्तेमाल किया जाएगा। सोमवार को इस बदलाव के कारण Nifty 50 में करीब 200 अंकों का तेज उछाल देखा गया, और यह 24,774.3 पर बंद हुआ, जो 1.6% की बढ़ोतरी थी। वहीं, इसी दौरान BSE Sensex में 0.7% की मामूली बढ़ोतरी हुई। दोनों एक्सचेंजों पर लिस्टेड स्टॉक्स के लिए प्राइस में यह अंतर ट्रेडर्स के बीच चिंता पैदा कर रहा है।

ऑप्शंस ट्रेडर्स के लिए सेटलमेंट का रिस्क?

Nifty 50 ऑप्शंस रखने वाले निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए क्लोजिंग प्राइस बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यही कॉन्ट्रैक्ट्स की फाइनल सेटलमेंट वैल्यू तय करता है। सोमवार को देखी गई अस्थिरता ने यह डर बढ़ा दिया है कि आखिरी 20 मिनट के दौरान अचानक होने वाले प्राइस स्विंग से इन कॉन्ट्रैक्ट्स की वैल्यू पर अप्रत्याशित असर पड़ सकता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि ट्रेडर्स अब दोपहर 3:15 बजे ऑक्शन विंडो शुरू होने से पहले ही अपनी पोजीशन से बाहर निकलना या हैज (Hedge) करना पसंद कर सकते हैं, ताकि प्रीमियम में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से बच सकें। हालांकि, इस ऑक्शन का दीर्घकालिक लक्ष्य भारतीय बाजारों को वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप लाना और प्राइस डिस्कवरी को बेहतर बनाना है, लेकिन शुरुआती समायोजन अवधि ने अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।

बाजार का आउटलुक और आगे क्या?

हालांकि शुरुआती अनुभव थोड़ा उथल-पुथल भरा रहा है, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह नया ढांचा भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए एक जरूरी कदम है। सोमवार के ऑक्शन के दौरान देखा गया उच्च ट्रेडिंग वॉल्यूम बताता है कि भागीदारी पहले से ही इस नई विंडो की ओर बढ़ रही है। फिर भी, आज की एक्सपायरी के लिए मुख्य थीम सावधानी की ही है। निवेशकों को आज ट्रेडिंग के आखिरी 20 मिनट के दौरान इंडेक्स के व्यवहार पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि बाजार नई प्राइसिंग मैकेनिज्म को समझने के लिए अपनी रणनीतियों को लगातार समायोजित कर रहा है। पार्टिसिपेंट्स के लिए मुख्य फोकस यह देखना होगा कि क्या ट्रेडर्स और एल्गोरिदम के इस सिस्टम से अधिक परिचित होने पर ऑक्शन प्रक्रिया में अधिक स्थिरता दिखाई देती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.