26 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी के साथ कारोबार शुरू होने की संभावना है। लगातार चार दिनों की गिरावट के बाद Nifty 50 अब **22,600** के स्तर पर है। ग्लोबल मार्केट से मिल रहे सुस्त संकेतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सीधा असर बाजार के सेंटिमेंट पर दिख रहा है।
भारतीय इक्विटी बाजार के लिए सोमवार, 26 अक्टूबर का दिन चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। GIFT Nifty के संकेत बता रहे हैं कि बाजार सुस्ती के साथ खुलेगा। पिछले सप्ताह की बात करें तो बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार 4 सत्रों तक गिरावट दर्ज की गई है। 23 अक्टूबर को बंद हुए बाजार में Nifty 50 0.39% गिरकर 22,600 के स्तर पर बंद हुआ, वहीं BSE Sensex 0.17% फिसलकर 73,123.83 पर रहा।
ग्लोबल मार्केट की मायूसी
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी संकेतों का है। वॉल स्ट्रीट में Dow Jones Industrial Average 1.2% से अधिक टूटा है। इसके पीछे मुख्य वजह फेडरल रिजर्व की अपकमिंग पॉलिसी मीटिंग और कॉर्पोरेट अर्निंग्स को लेकर अनिश्चितता है। एशियाई बाजारों का हाल भी कुछ ऐसा ही है; जापान का Nikkei 225 0.5% गिर गया है और दक्षिण कोरियाई बाजार भी दबाव में हैं।
FIIs बनाम DIIs की लड़ाई
बाजार के लिए एक अहम पहेली विदेशी और घरेलू निवेशकों का व्यवहार है। जहां FIIs लगातार बिकवाली कर रहे हैं, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। 23 अक्टूबर को DIIs ने ₹3,236 करोड़ के शेयर खरीदे, जिससे गिरावट की रफ्तार पर कुछ लगाम लगी है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या DIIs की यह खरीदारी विदेशी बिकवाली को सोख पाएगी।
कमोडिटी और अन्य फैक्टर्स
कच्चे तेल की कीमतें $101 प्रति बैरल के आसपास हैं, और भू-राजनीतिक तनाव ने आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनाए रखी हैं। वहीं, गोल्ड की कीमतें $4,000 के पास सुस्त हैं। अब निवेशकों का फोकस कॉर्पोरेट नतीजों पर शिफ्ट हो रहा है, जहां वे उन्हीं कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो बढ़ती लागत के बीच भी अपना प्रॉफिट मार्जिन बचाने में कामयाब हैं।
