बाजार के सितंबर सीरीज की शुरुआत के साथ ही विदेशी निवेशकों (FIIs) ने इंडेक्स फ्यूचर्स में भारी शॉर्ट पोजीशन बनाई है, जो Nifty की तेजी के लिए बड़ी रुकावट बन गई है। हालांकि, घरेलू निवेशक (DIIs) लगातार खरीदारी कर बाजार को सहारा दे रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार इस समय एक जबरदस्त 'टग-ऑफ-वॉर' (रस्साकशी) के दौर से गुजर रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इंडेक्स फ्यूचर्स में 1.86 लाख शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट्स का एक मजबूत 'शॉर्ट वॉल' खड़ा कर दिया है। आसान शब्दों में समझें तो, शॉर्ट पोजीशन का मतलब है बाजार के नीचे जाने पर दांव लगाना। जब इतने बड़े पैमाने पर संस्थागत खिलाड़ी दांव लगाते हैं, तो यह बाजार के लिए एक सीलिंग (सीलिंग) का काम करता है, जिससे Nifty 50 के लिए ऊपर बढ़ना मुश्किल हो जाता है।
डीआईआई (DIIs) का सहारा
विदेशी निवेशक जहां डेरिवेटिव्स में बाजार के खिलाफ हैं, वहीं कैश मार्केट में वे एक अलग रणनीति अपना रहे हैं। डेटा बताता है कि ये शॉर्ट पोजीशन असल में उनके लॉन्ग-टर्म होल्डिंग्स के खिलाफ एक 'हेज' (Hedge) या बीमा की तरह काम कर रही हैं। फिलहाल, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) बाजार को गिरने से बचाने वाली मुख्य ताकत बने हुए हैं। 27 अगस्त तक DIIs ने बाजार में ₹4,977 करोड़ की कैश खरीदारी की है, जो सेलिंग प्रेशर को सोख रही है।
अहम सपोर्ट लेवल पर नजर
निवेशकों के लिए 24,000 का सपोर्ट लेवल 'लाइन इन द सैंड' की तरह है। यदि Nifty 50 इस स्तर के नीचे फिसलता है, तो भारी बिकवाली देखने को मिल सकती है। साथ ही, इंडिया VIX (India VIX) का 11 के पास रहना यह बताता है कि बाजार फिलहाल शांत तो है, लेकिन किसी भी ग्लोबल हलचल के प्रति बहुत संवेदनशील है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या FIIs अपनी शॉर्ट कवरिंग (Short Covering) शुरू करते हैं। जब तक वे अपने दांव वापस नहीं लेते, बाजार के एक रेंज में फंसे रहने की संभावना ज्यादा है। निवेशकों को सलाह है कि वे 24,000 के लेवल और घरेलू संस्थाओं की खरीदारी की रफ्तार पर बारीकी से नजर रखें।
