Nifty 50 में हल्की नरमी है, लेकिन India VIX अभी भी निचले स्तरों पर बना हुआ है। इस डायवर्जेंस की वजह से 'नेकेड पुट' खरीदना महंगा साबित हो रहा है, क्योंकि मार्केट गिरने के बावजूद प्रीमियम नहीं बढ़ रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार का मौजूदा व्यवहार डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। सामान्य तौर पर जब भी Nifty 50 गिरता है, तो बाजार में डर का माहौल बनता है, जिससे इंडिया VIX में तेजी आती है। लेकिन हालिया सत्रों में, इंडेक्स नीचे खिसक रहा है और VIX 10.5 से 11.5 के दायरे में शांत बना हुआ है। यह डर की कमी बताती है कि बाजार फिलहाल पैनिक सेलिंग नहीं, बल्कि कंसोलिडेशन के दौर में है।
ऑप्शंस बाइंग का छिपा हुआ खतरा
जो ट्रेडर्स 'नेकेड पुट' (बिना किसी हेजिंग के पुट खरीदना) का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके लिए यह स्थिति काफी जोखिम भरी है। आमतौर पर मार्केट गिरने पर ऑप्शन प्रीमियम बढ़ते हैं, जो बायर के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन VIX कम होने की वजह से प्रीमियम नहीं बढ़ रहे हैं, और ट्रेडर्स को लगातार 'थीटा डिके' (Theta Decay) यानी टाइम डिके की मार झेलनी पड़ रही है। इसका मतलब है कि Nifty के मामूली गिरने पर भी आपके खरीदे हुए ऑप्शंस की वैल्यू रोज कम हो रही है।
स्प्रेड स्ट्रेटेजी से रिस्क मैनेजमेंट
इस स्थिति से निपटने के लिए ट्रेडर्स अब 'बियर पुट स्प्रेड' (Bear Put Spread) जैसी स्ट्रक्चरल स्ट्रेटेजीज की ओर रुख कर रहे हैं। इसमें एक पुट ऑप्शन खरीदने के साथ-साथ निचले स्ट्राइक का पुट बेचा जाता है। इससे ट्रेड की लागत कम होती है और टाइम डिके का असर भी सीमित हो जाता है। यह रणनीति हाई-रिस्क बेट्स के बजाय पूंजी बचाने पर ज्यादा फोकस करती है।
वोलेटिलिटी पर नजर रखना क्यों है जरूरी
बाजार फिलहाल एक 'कॉशियस ग्राइंड' मोड में है। जब तक इंडिया VIX इंडेक्स के साथ कदम मिलाकर नहीं चलता, तब तक किसी भी दिशा में बड़े मूव की उम्मीद कम है। जब तक VIX में कोई बड़ा बदलाव न दिखे या Nifty अहम सपोर्ट लेवल को निर्णायक रूप से न तोड़ दे, तब तक ट्रेडर्स को हाई-प्रीमियम वाले ट्रेड से बचने की सलाह दी जा रही है।
