31 अगस्त 2026 को Nifty 50 इंडेक्स **24,029** के स्तर पर बंद हुआ। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण बाजार में दबाव बना हुआ है, जिससे यह इंडेक्स लगातार तीसरे महीने गिरावट के साथ बंद हुआ है और **24,000** का अहम सपोर्ट लेवल खतरे में है।
अगस्त का महीना भारतीय बाजार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। Nifty 50 ने महीने का समापन 24,029.45 के स्तर पर किया, जो दिन भर की 0.60% की गिरावट को दर्शाता है। कारोबार के दौरान एक समय इंडेक्स 23,994 के निचले स्तर तक भी गया, जिसने 24,000 के अहम सपोर्ट जोन को लेकर निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी थीं। इस गिरावट के साथ ही इंडेक्स ने लगातार तीसरे महीने लाल निशान में बंद होकर निवेशकों को निराश किया है, जिसमें अगस्त माह में कुल 3.1% की कमजोरी दर्ज की गई।
कच्चे तेल की आग और जियोपॉलिटिकल तनाव
बाजार की सुस्ती के पीछे सबसे बड़ी वजह ग्लोबल कमोडिटी मार्केट है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण Brent क्रूड ऑयल की कीमतें $91 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। भारत के लिए यह बड़ा झटका है क्योंकि तेल आयात महंगा होने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा और महंगाई का खतरा फिर से गहरा सकता है, जिससे निवेशक डिफेंसिव मोड में आ गए हैं।
बैंक निफ्टी का दमखम
जहां चौतरफा बिकवाली दिख रही थी, वहीं Bank Nifty ने निवेशकों को थोड़ी राहत दी। इंडेक्स 0.92% की मजबूती के साथ 58,024.95 पर बंद हुआ। प्राइवेट बैंकों के चुनिंदा शेयरों में आई तेजी से इंडेक्स को शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर निकलने में मदद मिली। हालांकि, मार्केट की ओवरऑल ब्रिड्थ कमजोर रही और अधिकांश शेयरों में बिकवाली का दौर बना रहा।
वोलेटिलिटी और टेक्निकल संकेत
बाजार का डर बताने वाला इंडेक्स India VIX लगभग 4.78% चढ़कर 11.19 पर बंद हुआ। एक्सपर्ट्स का मानना है कि Nifty 50 का अपने प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे ट्रेड करना चिंता का विषय है। यदि इंडेक्स 24,000 के स्तर को स्थायी रूप से तोड़ने में नाकाम रहता है, तो यह गिरावट 23,800 के स्तर तक बढ़ सकती है।
निवेशकों की नजरें कहां हैं?
आने वाले सत्रों में निवेशकों का ध्यान ग्लोबल सेंट्रल बैंक, खासकर US Federal Reserve के फैसलों और ब्याज दरों के संकेतों पर होगा। इसके अलावा, Red Sea क्षेत्र में तेल सप्लाई को लेकर आने वाली खबरें और क्रूड ऑयल की चाल बाजार की अगली दिशा तय करेगी।
