हफ्ते के आखिरी कारोबारी सत्र में Nifty 50 इंडेक्स **23,897.70** के स्तर पर बंद हुआ है। इंडेक्स में **1.15%** की कमजोरी दर्ज की गई है, क्योंकि **24,000** के अहम स्तर को पार करना निवेशकों के लिए चुनौती बना हुआ है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह काफी दबाव भरा रहा। Nifty 50 लगातार चौथे हफ्ते लाल निशान में बंद हुआ है, जो बाजार के सुस्त मूड को दर्शाता है। खरीदार 24,000 के साइकोलॉजिकल रेजिस्टेंस को पार करने में नाकाम रहे हैं, जिससे इंडेक्स के रिकवरी मोड में आने की उम्मीदें फिलहाल टल गई हैं।
ग्लोबल दबाव और कच्चे तेल की चिंता
बाजार पर इस समय बाहरी कारकों का साया है। क्रूड ऑयल की कीमतें $95 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर डाल सकती हैं। इसके अलावा, वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव ने निवेशकों के रिस्क लेने की क्षमता को काफी कम कर दिया है। बाजार अब हर छोटी हलचल पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।
टेक्निकल चार्ट और सपोर्ट लेवल्स
टेक्निकल तौर पर देखा जाए तो Nifty 50 अपने प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है। चार्ट्स पर तत्काल सपोर्ट जोन 23,700 से 23,800 के बीच बना हुआ है। अगर इंडेक्स इस दायरे को नहीं बचा पाता है, तो बाजार में और नीचे के स्तर देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल मार्केट में 'सेल ऑन राइज' (ऊपरी स्तर पर बिकवाली) का माहौल है।
7 सितंबर से बदलेंगे ट्रेडिंग नियम
अगले हफ्ते से ट्रेडर्स को एक बड़े बदलाव के लिए तैयार रहना होगा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 7 सितंबर, 2026 से इक्विटी डेरिवेटिव्स के लिए 'प्री-ओपन कॉल-ऑक्शन' का नया फ्रेमवर्क लागू कर रहा है। इसका मकसद ट्रेडिंग सेशन की शुरुआत में बेहतर प्राइस डिस्कवरी करना है। इंडेक्स और स्टॉक फ्यूचर्स में ऑर्डर फ्लो कैसे काम करेगा, इसे लेकर निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
