भारतीय शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट देखने को मिली। RBI ने रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी कर इसे **5.50%** कर दिया है, जिससे निवेशकों की उम्मीदों को झटका लगा है।
7 अक्टूबर, 2026 को Nifty 50 इंडेक्स 173.05 अंक यानी 0.76% की गिरावट के साथ 22,603.05 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट के पीछे RBI की Monetary Policy Committee का बड़ा फैसला है। रेपो रेट में 0.25% का इजाफा होने से अब कमर्शियल बैंकों के लिए लोन लेना महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा।\n\n### RBI का नया स्टैंड: 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग'\n\nबाजार के लिए सबसे बड़ा सरप्राइज पॉलिसी स्टैंड में बदलाव रहा। RBI ने अपने रुख को 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) कर दिया है। इसका साफ मतलब है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई गुंजाइश नहीं है। निवेशकों को जो उम्मीद थी कि साल के अंत तक राहत मिल सकती है, उस पर पानी फिर गया है।\n\n### इन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा दबाव\n\nब्याज दरों के प्रति संवेदनशील (Interest-sensitive) सेक्टर्स जैसे ऑटो और रियल एस्टेट में भारी बिकवाली देखी गई। लोन महंगे होने के कारण कार और घरों की डिमांड घटने का डर है, जिससे इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।\n\n### टेक्निकल आउटलुक\n\nफिलहाल, बाजार 22,600 के अहम सपोर्ट लेवल पर टिका है। एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर निफ्टी इस लेवल को नहीं संभाल पाया, तो 22,200 से 22,500 के जोन तक फिसल सकता है। ऊपर की तरफ 22,750-22,800 का लेवल एक बड़ी बाधा बना हुआ है।\n\nग्लोबल स्तर पर क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली भी मार्केट सेंटीमेंट को खराब कर रही है। अब सबकी नजरें कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्री पर होंगी कि वे महंगे कर्ज के दौर में अपने ऑपरेशंस को कैसे मैनेज करते हैं।
