शेयर बाजार में हलचल तेज है। Nifty 50 अपने **200-वीक मूविंग एवरेज (WMA)** के बेहद अहम लेवल यानी **22,607** के पास ट्रेड कर रहा है। निवेशक इस लेवल पर नजर टिकाए हुए हैं क्योंकि इसका टूटना लंबे समय के ट्रेंड के लिए बड़ा संकेत हो सकता है।
बाजार की 'अग्निपरीक्षा'
NSE Nifty 50 के लिए यह हफ्ता काफी नाजुक है। 22,607 का स्तर केवल एक नंबर नहीं है, बल्कि यह वह 200-वीक मूविंग एवरेज (200-WMA) है जो तय करता है कि बाजार का लॉन्ग-टर्म ट्रेंड क्या है। तकनीकी रूप से, जब तक इंडेक्स इस लेवल के ऊपर रहता है, उसे बुल फेज में माना जाता है। इतिहास गवाह है कि Nifty 50 ने इस सपोर्ट को तोड़ना काफी मुश्किल पाया है। पिछली बार जब ऐसा हुआ था, तो वह 2008 का ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस या 2020 की कोविड-19 महामारी जैसे बड़े संकटों का दौर था, जिसके बाद बाजार में काफी गिरावट देखी गई थी।
क्यों बढ़ रही है निवेशकों की चिंता?
चिंता की बात यह है कि इंडेक्स के प्रमुख दिग्गज (Heavyweights) पहले ही इस रेस में पीछे छूट गए हैं। Nifty 50 की 12 बड़ी कंपनियां अपने खुद के 200-वीक मूविंग एवरेज के नीचे ट्रेड कर रही हैं। इसमें Reliance Industries, HDFC Bank, Infosys, ITC, और Hindustan Unilever जैसे दिग्गज शामिल हैं। इन स्टॉक्स में कमजोरी के कारण इंडेक्स को रिकवरी के लिए सहारा नहीं मिल पा रहा है।
अगर 22,607 का लेवल टूटा, तो क्या होगा?
एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर यह लेवल होल्ड नहीं कर पाया, तो सेलिंग प्रेशर (Selling Pressure) काफी बढ़ सकता है, क्योंकि कई ट्रेडिंग एल्गोरिदम इसी लेवल के आधार पर काम करते हैं। यदि गिरावट और गहरी होती है, तो अगली सपोर्ट रेंज 21,700 से 22,200 के आसपास देखी जा सकती है। फिलहाल, सभी की नजरें इंडेक्स के हैवीवेट्स की चाल और 22,607 के डिफेंस पर टिकी हैं।
