शेयर बाजार में Nifty 50 ने एक बेहद दुर्लभ टेक्निकल माइलस्टोन पार कर लिया है। इंडेक्स लगातार 160 ट्रेडिंग सेशंस से अपने 200-डे मूविंग एवरेज (200-DMA) के नीचे बना हुआ है, जो बाजार में लंबे समय से जारी सुस्ती को दर्शाता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 200-डे मूविंग एवरेज किसी भी इंडेक्स की लॉन्ग-टर्म हेल्थ को मापने का सबसे भरोसेमंद पैमाना माना जाता है। इस बार इंडेक्स का इस लेवल के नीचे 160 दिनों तक टिकना एक ऐतिहासिक घटना है, लेकिन अच्छी बात यह है कि यह गिरावट उतनी घातक नहीं है, जितनी अतीत की बड़ी मंदी में देखी गई थी।\n\n### तुलनात्मक अंतर और मौजूदा स्थिति\n\nसाल 2008-2009 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान, Nifty 50 करीब 227 दिनों तक अपने 200-DMA के नीचे रहा था और उस समय बाजार में 40% से ज्यादा की गिरावट आई थी। इसके उलट, मौजूदा दौर में इंडेक्स अपने 200-DMA (जो फिलहाल 24,136 पर है) से केवल 6% ही नीचे कारोबार कर रहा है। यह साफ संकेत है कि बाजार फिलहाल एक लंबे 'स्टैग्नेशन' (Stagnation) फेज में है, न कि किसी बड़े क्रैश की चपेट में।\n\n### बाजार पर दबाव क्यों है?\n\nबाजार की इस सुस्ती के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं:\n* जियोपॉलिटिकल टेंशन: वैश्विक अनिश्चितता ने सेंटीमेंट को खराब किया है।\n* FII की बिकवाली: विदेशी निवेशकों के लगातार बिकवाल बने रहने से तेजी पर लगाम लगी है।\n* मैक्रो फैक्टर्स: बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी इंडेक्स को ऊपर जाने से रोका है।\n\nहालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी ने बाजार को एक निचला स्तर (Floor) तो दिया है, लेकिन 24,136 के रेजिस्टेंस को पार करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।\n\n### निवेशकों के लिए अहम सपोर्ट लेवल्स\n\nतकनीकी चार्ट्स पर इंडेक्स फिलहाल एक नाजुक मोड़ पर है। ट्रेडर्स और निवेशकों को अब 22,800 और 22,750 के लेवल्स पर कड़ी नजर रखनी होगी। अगर इंडेक्स इन सपोर्ट लेवल्स को बचाने में नाकाम रहता है, तो बिकवाली और तेज हो सकती है। वहीं, अगर ये स्तर होल्ड रहते हैं, तो इंडेक्स वापस 23,000 की रेंज में जाने की कोशिश कर सकता है।
