8 अक्टूबर 2026 को Nifty 50 में बड़ी गिरावट देखी गई है। RBI द्वारा अचानक रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट** की बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है, जिससे इंडेक्स **22,500** के अहम सपोर्ट लेवल को तोड़कर नीचे आ गया है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन काफी चुनौतीपूर्ण रहा। Nifty 50 ने सुबह के सत्र में 22,500 के मनोवैज्ञानिक स्तर को गंवा दिया है, जो कि निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। बाजार पर चौतरफा दबाव दिख रहा है।
रेपो रेट हाइक का असर
बाजार की कमजोरी की सबसे बड़ी वजह RBI का हालिया फैसला है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की चौंकाने वाली बढ़ोतरी की है, जिससे यह अब 5.50% हो गया है। RBI ने इसे 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (calibrated tightening) करार दिया है। जानकारों का मानना है कि इससे कर्ज महंगा होगा, जिसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और क्रेडिट डिमांड पर पड़ेगा।
बाहरी मोर्चे पर भी तनाव
घरेलू मुश्किलों के बीच ग्लोबल संकेत भी खराब हैं। कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें बढ़कर करीब $102 प्रति बैरल पहुंच गई हैं। तेल की बढ़ती कीमतों से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे महंगाई का खतरा और रुपया दोनों पर दबाव बन सकता है। यही वजह है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वालों के मुकाबले काफी ज्यादा है।
FII की बिकवाली का जोर
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख अभी भी काफी नेगेटिव बना हुआ है। बीते कारोबारी सत्र में FII ने भारतीय बाजार से ₹6,121.40 करोड़ के शेयर बेचे हैं। जब तक विदेशी फंड्स की बिकवाली थमेगी नहीं, इंडेक्स के लिए संभलना मुश्किल है।
अब आगे क्या?
टेक्निकल तौर पर देखें तो इंडेक्स के लिए अब अगला सपोर्ट लेवल 22,400 के आसपास नजर आ रहा है। अगर इंडेक्स यहां से और फिसलता है, तो गिरावट बढ़ सकती है। रिकवरी के लिए बाजार का 22,500 के ऊपर दोबारा निकलना बेहद जरूरी है। फिलहाल निवेशकों को FII डेटा और कच्चे तेल की चाल पर कड़ी नजर रखनी होगी।
