भारत के स्टॉक एक्सचेंजों ने 3 अगस्त, 2026 से F&O स्टॉक्स के लिए अनिवार्य क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) शुरू किया है। इस बदलाव से अंतिम कीमतों का निर्धारण अलग तरह से होगा, जिससे Nifty50 और BSE Sensex के प्रदर्शन में एक बड़ा अंतर देखा जा रहा है। निवेशकों को इस नए नियम को समझने और इसके अनुसार ढलने में थोड़ा समय लग सकता है।
SEBI का नया नियम: क्या है क्लोजिंग ऑक्शन सेशन?
भारतीय शेयर बाजार में 3 अगस्त, 2026 से एक बड़ा बदलाव आया है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के निर्देश पर, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट के स्टॉक्स के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को अनिवार्य कर दिया गया है। इस नियम के तहत, इन स्टॉक्स की नियमित ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे समाप्त हो जाएगी, जो पहले 3:30 बजे तक चलती थी। इसके बाद, ऑक्शन के ज़रिए क्लोजिंग प्राइस तय किया जाएगा।
नया क्लोजिंग मैकेनिज्म कैसे काम करेगा?
CAS एक 20 मिनट की विंडो है, जो दोपहर 3:15 से 3:35 तक चलेगी। इस दौरान, एक्सचेंज दोपहर 3:00 से 3:15 बजे के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर एक रेफरेंस प्राइस तय करेगा, जो 3% के प्राइस बैंड में होगा। इसके बाद, सिस्टम एक ऐसा इक्विलिब्रियम प्राइस ढूंढेगा जहां सबसे ज़्यादा खरीद और बिक्री के ऑर्डर्स मैच हो सकें। यह तरीका, दिन के आखिरी 30 मिनट के VWAP से क्लोजिंग प्राइस निकालने के पुराने तरीके की जगह लेगा।
निवेशकों के लिए, इस प्रक्रिया में 5 मिनट रेफरेंस प्राइस कैलकुलेशन के लिए, और फिर ऑर्डर एंट्री और रैंडमाइज्ड क्लोजिंग के लिए समय होगा। जो स्टॉक्स F&O सेगमेंट का हिस्सा नहीं हैं, उन पर इसका कोई असर नहीं होगा और वे 3:30 बजे तक सामान्य रूप से ट्रेड करते रहेंगे। इस सुधार का मुख्य मकसद भारतीय बाजार की प्रक्रियाओं को लंदन स्टॉक एक्सचेंज और न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज जैसे वैश्विक मानकों के अनुरूप लाना है, ताकि पारदर्शिता और कुशलता बढ़ाई जा सके।
इंडेक्स बेंचमार्क पर असर
इस नए मैकेनिज्म के लागू होने के बाद सोमवार को भारत के दो प्रमुख इंडेक्स, Nifty50 और BSE Sensex के प्रदर्शन में एक असामान्य अंतर देखा गया। Nifty50 में 1.60% की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि BSE Sensex सिर्फ 0.70% बढ़ा। विश्लेषकों का मानना है कि यह अंतर इसलिए आया क्योंकि अब बेंचमार्क पुराने VWAP तरीके के बजाय, ऑक्शन से तय हुए प्राइस से प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा, NSE और BSE अपने-अपने ऑर्डर बुक्स और स्टॉक्स के लिए अलग-अलग ऑक्शन प्रक्रियाएं करते हैं, इसलिए एक ही स्टॉक के लिए अलग-अलग एक्सचेंजों पर प्राइस में भिन्नता सीधे इंडेक्स की चाल को प्रभावित कर सकती है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि यह एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव है। SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह ने CAS को एक दीर्घकालिक सकारात्मक सुधार बताया, लेकिन यह भी कहा कि इंडेक्स मूवमेंट में शुरुआती अंतर सामान्य बात है। इसी तरह, गोल्डमैन सैक्स जैसी ब्रोकरेज फर्मों की रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआत में ऑक्शन में भागीदारी उम्मीद से कम थी, लेकिन उनका मानना है कि ट्रेडर्स के इस नए सिस्टम से परिचित होने के बाद संस्थागत भागीदारी बढ़ेगी। निवेशकों को अगले कुछ दिनों में इस 20 मिनट की विंडो में लिक्विडिटी (तरलता) पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि अधिक स्थिर भागीदारी से क्लोजिंग प्राइस की अस्थिरता कम होने की उम्मीद है।
