ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए नई GST गाइडलाइंस को लेकर हलचल तेज है। Nasscom ने वित्त मंत्रालय से इन नियमों के लागू होने की तारीख को बढ़ाकर **1 जनवरी 2027** करने की मांग की है, ताकि कंपनियां अपनी तकनीकी खामियों को दूर कर सकें।
तकनीकी बदलाव की चुनौती
Nasscom का कहना है कि 57वीं GST काउंसिल द्वारा प्रस्तावित 5% टैक्स रेट और सेक्शन 9(5) के तहत नई जिम्मेदारियों को लागू करने के लिए सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का पूरा मॉडल ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर और ERP सिस्टम पर टिका है। ऐसे में अचानक हुए बदलाव से बिलिंग और टैक्स कैलकुलेशन में बड़ी तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
इन्वेस्टर्स को इस खबर पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है क्योंकि इसका सीधा असर कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा। अगर कंपनियां इस टैक्स के बोझ को ग्राहकों पर शिफ्ट नहीं कर पाती हैं, तो उनके नेट प्रॉफिट पर दबाव दिख सकता है। इसके अलावा, नए नियमों के मुताबिक अपने सॉफ्टवेयर को अपडेट करने के लिए कंपनियों को टेक्नोलॉजी पर अतिरिक्त खर्च (Capital Spending) करना होगा।
आगे की राह
फिलहाल वित्त मंत्रालय इस अर्जी पर विचार कर रहा है। अगर सरकार इसे मंजूरी देती है, तो कंपनियों को तैयारी के लिए एक 'बफर' मिल जाएगा। वहीं, यदि नियमों को तुरंत लागू किया जाता है, तो ऑपरेशंस में बड़ी रुकावटें (Operational Bottlenecks) आने का जोखिम बना हुआ है, जिससे सर्विस की स्पीड और एफिशिएंसी प्रभावित हो सकती है।
